सिंगरौली में कोयला डंपरों से 10 साल में 2084 मौतें

Advertisement
सिंगरौली की सड़कें अब आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि मौत का रास्ता बन चुकी हैं। पिछले 10 वर्षों में कोयला डंपरों और भारी वाहनों की चपेट में आकर जिले में 2084 लोगों की जान जा चुकी है। हर साल औसतन 200 से ज्यादा लोग सड़क हादसों में अपनी जिंदगी गंवा रहे हैं। लगातार हो रही मौतों से गुस्साए लोग कई जगहों पर डंपरों में आग लगा रहे हैं, वहीं समाजसेवियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर इन वाहनों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
8 जनवरी को बैढ़न निवासी कमला प्रसाद शाह के 25 वर्षीय बेटे पंकज की कोयला डंपर की टक्कर से मौत हो गई। पंकज घर का इकलौता कमाने वाला था। दो साल पहले शादी हुई थी और एक साल का बेटा है। पिता का सवाल है अब मेरे बेटे के परिवार का क्या होगा ।
जिले में 10 से अधिक कोल माइंस और 10 थर्मल पावर प्लांट हैं। हर दिन हजारों भारी-भरकम डंपर और ट्रेलर कोयला और राख लेकर संकरी व जर्जर सड़कों से गुजरते हैं। यही वाहन अब सिंगरौली के लिए ‘यमदूत’ बन गए हैं।
दो घटनाएं, जो बयां करती हैं हर घर का दर्द
केस-1: सब्जी लेने गया बेटा लौटकर नहीं आया
30 नवंबर को सोनमती के बेटे सूरज सिंह की कोयला डंपर की टक्कर से मौत हो गई। सोनमती कहती हैं, “मेरा बेटा चाचा के साथ बाजार गया था। लौटते वक्त पीछे से डंपर ने टक्कर मार दी। मेरा बेटा वहीं खत्म हो गया।
केस-2: बच्चों के साथ मौत के मुंह से लौटे आसाराम
आसाराम वैश्य बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहे थे, तभी सामने से कोयला डंपर आ गया और उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी। शिकायत करने पहुंचे तो धमकियां मिलीं और थाने में भी सुनवाई नहीं हुई।
क्यों बन गईं सिंगरौली की सड़कें ‘किलिंग जोन’?
● आम सड़कों पर भारी वाहन – नागरिकों की सड़कों पर ही हजारों डंपर दौड़ते हैं, कोई अलग कॉरिडोर नहीं।
● ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार – क्षमता से ज्यादा कोयला भरकर तेज गति से वाहन चलाए जाते हैं।
● खराब सड़कें और धूल – जर्जर सड़कें, उड़ती कोयले की धूल, कम विजिबिलिटी और फिसलन हादसों को बढ़ा रही
है।
● नियमों की अनदेखी – ट्रैफिक नियमों का खुलेआम उल्लंघन, प्रशासन की ढिलाई से ड्राइवरों में कानून का डर खत्म।
लगातार हो रही मौतों को देखते हुए समाजसेवी राजेश सोनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। सुनवाई जारी है।
