भागीरथपुरा दूषित पेयजल मामला न्यायिक जांच आयोग गठित, 4 हफ्ते में हाईकोर्ट को देनी होगी अंतरिम रिपोर्ट

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इंदौर भागीरथपुरा क्षेत्र में इंदौर नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए दूषित पेयजल से 29 लोगों की मौत और 3300 से अधिक नागरिकों के बीमार होने के गंभीर मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि यह आयोग चार सप्ताह के भीतर अपनी अंतरिम रिपोर्ट हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत करेगा। साथ ही जिला प्रशासन, इंदौर नगर निगम, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जांच में पूर्ण सहयोग देने तथा आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
न्यायिक आयोग भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल के दूषित होने के वास्तविक कारणों, मृतकों की सही संख्या, नगर निगम द्वारा स्वच्छ जल आपूर्ति को लेकर किए गए दावों सहित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत जांच करेगा। आयोग को शासन द्वारा कार्यालय, स्टाफ और आवागमन की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आम जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना उनका मौलिक अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा कि स्थिति अत्यंत गंभीर और खतरनाक है। भागीरथपुरा की जानकारी सामने आते ही हाईकोर्ट परिसर की पानी की टंकी की भी जांच करवाई गई है।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि महू क्षेत्र से भी दूषित पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं, जो पूरे मामले को और गंभीर बनाती हैं। हाईकोर्ट ने शासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता को साफ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए, लेकिन वर्तमान हालात में यह सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। इसी के चलते कोर्ट ने मामले की न्यायिक जांच का फैसला लिया है।
