पद्मश्री जोधइया बाई बैगा की स्मृतियों को समर्पित ‘Bloom at Dusk’ प्रदर्शनी

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दिल्ली की प्रतिष्ठित ओजस आर्ट गैलरी (Ojas Art) में आदिवासी कला की सशक्त आवाज रहीं पद्मश्री से सम्मानित कलाकार जोधइया बाई बैगा (1937–2024) के जीवन और रचनात्मक यात्रा पर आधारित विशेष कला प्रदर्शनी ‘Bloom at Dusk’ का शुभारंभ हो चुका है। यह प्रदर्शनी 11 मार्च तक आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी। प्रदर्शनी में जोधइया बाई बैगा के जीवन के विभिन्न पड़ावों को दर्शाती 50 से अधिक पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में कला प्रेमी पहुंच रहे हैं।
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के घने जंगलों में जन्मीं जोधइया बाई बैगा का जीवन संघर्षों से भरा रहा। कभी जंगल से लकड़ियां बीनकर तो कभी वन उपज इकट्ठा कर उन्होंने परिवार का पालन-पोषण किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और जीवन के अंतिम दौर में अपनी विशिष्ट कला पहचान स्थापित की। उनकी जीवन यात्रा आम लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
प्रदर्शनी में शामिल पेंटिंग्स बैगा समुदाय की संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विश्वासों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं। भगवान भोलेनाथ, बघेसुर (बाघ देव), महुआ का पेड़, जंगल, पशु-पक्षी और आदिवासी जीवनशैली उनकी कला के प्रमुख विषय रहे हैं। इन चित्रों के माध्यम से दर्शक प्रकृति और मानव के बीच पुराने और गहरे संबंध को महसूस कर पा रहे हैं।
जोधइया बाई बैगा की कला केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर भी सवाल उठाती है। उनकी चर्चित कृति ‘The Burning of Bandhavgarh’ जंगलों में लगने वाली आग और पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर तीखा संदेश देती है। यह रचना विकास और प्रकृति के बीच असंतुलन पर सोचने को मजबूर करती है।
उल्लेखनीय है कि जोधइया बाई बैगा को वर्ष 2022 में नारी शक्ति पुरस्कार और 2023 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उनकी कलाकृतियां भारत के साथ-साथ मिलान, पेरिस और दिल्ली जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच चुकी हैं। यह रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनी पहली बार दर्शकों को उनकी पूरी कलात्मक यात्रा एक ही स्थान पर देखने का अवसर प्रदान कर रही है।
प्रदर्शनी के क्यूरेटर मिनहाज़ मजूमदार के अनुसार, जोधइया बाई बैगा की कला स्मृतियों, परंपराओं और अनुभवों को सशक्त रंगों के माध्यम से जीवंत करती है। वहीं ओजस आर्ट के डायरेक्टर अनुभव नाथ का कहना है कि यह प्रदर्शनी उनकी कला विरासत को सम्मान देने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
