चंडीगढ़ के कलाकारों ने ‘नागमंडल’ से जीता दर्शकों का दिल

Advertisement
छतरपुर। छतरपुर शहर के ऑडिटोरियम में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज एवं जिला प्रशासन छतरपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विरासत कला उत्सव के सातवें दिन रंगमंच प्रेमियों को एक यादगार अनुभव प्राप्त हुआ। चंडीगढ़ से आए कलाकारों ने प्रख्यात नाटककार गिरीश कर्नाड द्वारा रचित और अमित सनौरिया तथा सरवर अली के कुशल और कसे हुए निर्देशन में नाटक ‘नागमंडल’ की भावपूर्ण और सशक्त प्रस्तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। नाटक के हर दृश्य में भावनाओं की गहराई झलकती रही, जिससे पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राकेश सिंह कुशवाह रहे। विशिष्ट अतिथियों में जिला पंचायत सीईओ एवं डीएटीसीसी सचिव नमः शिवाय अरजरिया, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के निदेशक सुदेश शर्मा, विश्वविद्यालय के कार्य परिषद सदस्य नीरज भार्गव एवं समाजसेवी भगवत अग्रवाल उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।
‘नागमंडल’ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने लोककथा और आधुनिक संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। अभिनय, संवाद अदायगी, मंच सज्जा,गीत संगीत और प्रकाश व्यवस्था ने नाटक को और भी प्रभावशाली बना दिया। दर्शक पूरी प्रस्तुति के दौरान भावविभोर नजर आए और अंत में कलाकारों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
नाटक की प्रस्तुति के उपरांत मंच पर सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। समापन अवसर पर कुलगुरु डॉ. राकेश सिंह कुशवाह ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन जिले में लगातार होते रहने चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति, साहित्य और रंगमंच से जुड़ सके। उन्होंने ‘नागमंडल’ की उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए चंडीगढ़ से आए कलाकारों की मुक्त कंठ से सराहना की।
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के निदेशक सुदेश शर्मा ने इस सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन और स्थानीय संयोजक शिवेन्द्र शुक्ला सहित शंखनाद नाट्य मंच के सदस्यों का आभार जताते हुए भविष्य में भी लगातार सहयोग देने की बात कही। दर्शकों के भरपूर स्नेह के लिए छतरपुर की सुधि जनता का भी आभार जताया। समाजसेवी एवं व्यवसाई भगवत अग्रवाल ने कला ,संस्कृति के ऐसे उत्कृष्ट आयोजनों में हर संभव सहयोग देने की बात कही।
लोककथा पर आधारित है नाटक की कहानी
यह नाटक एक ऐसी नवविवाहित युवती की कहानी है जो विवाह के बाद प्रेम,सम्मान और पहचान से वंचित रह जाती है।उसका पति उससे भावनात्मक और शारीरिक रूप से दूर रहता है जिससे एक खाली घर में उसका जीवन एकांत,अपमान और क्रूर व्यवहार के कारण डर से भर जाता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब एक लोककथा के माध्यम से एक नाग मानवीय रूप धारण करके स्त्री के जीवन में प्रवेश करता है।वह नाग उसके पति का रूप रखकर उसके जीवन में प्रेम और स्नेह की बारिश कर देता है।लेकिन एक दिन में पति के दो स्वरूप जिसमें एक प्रेमपूर्ण है और दूसरा क्रूर,उसका जीवन दुविधाओं से भर जाता है।इस दुविधा को अपने सशक्त अभिनय से दीवजोत गुलाटी ने बखूबी चरितार्थ किया तो वहीं सैयद अलीम ने भी पति और फिर नाग के मानवीय के चरित्र में बार बार प्रवेश करके लोगों को चमत्कृत कर दिया। अंधी मां का अभिनय कर रहे अभिनेता राजा सुब्रमण्यम ने जबरदस्त ठहाके लगवाए और वाद्य यंत्रों की टीम का साथ भी बखूबी निभाया।नागप्पा बने पुलकित सैनी ने अपने मूवमेंट के जरिए ही बिना संवाद के बेहतर अभिनय करके तालियां बटोरीं। अन्य सहायक कलाकारों में अमित सनौरिया,हरदीप,धीरज कुमार यादव,दिव्यांशु,शुभम पासवान,खुशी पाल,खुशी सहगल,महीन वैद्य,और करणवीर सिंह रहे।मुख्य गायक पीयूष भट्ट,गायिका शुचिता शर्मा और कोरस में काजल ठाकुर,गौरी,गगनदीप,दिलराज,श्रुति और रवींद्र थे।डॉ मोहित कौशल के प्रबंधन में नाटक के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी।
नागमंडल केवल एक लोककथा नहीं बल्कि स्त्री अस्तित्व,विश्वास,पितृसत्ता,और आत्मसम्मान की गहन पड़ताल है जहां यथार्थ और कल्पना के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।
