यूजीसी कानून के विरोध में दमोह बंद: सर्व समाज का मिला व्यापक समर्थन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

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दमोह, राजेन्द्र तिवारी — विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों तथा कथित 'काला कानून' के विरोध में रविवार को दमोह शहर में सामान्य वर्ग (सवर्ण समाज) के लोगों ने बंद का सफलतापूर्वक आह्वान किया। इस बंद को पूरे शहर में व्यापक समर्थन मिला, जिसमें महिलाओं, पुरुषों, छात्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सक्रिय भागीदारी की। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध जताया और शहर के प्रमुख चौराहों पर रैली निकाली।
सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। करणी सेना के सैकड़ों सदस्यों ने भी आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी प्रदर्शनकारी अस्तपाल चौक पर एकत्र हुए, जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। नारे लगाए गए—“काला कानून वापस लो”, “जय श्री राम”, “जो हमसे टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा”, “मोदी मुर्दाबाद”, “दिग्विजय मुर्दाबाद” आदि। पुलिस प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखी, जिसमें नगर पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार रोविन जैन, कोतवाली प्रभारी सहित जिला प्रशासन और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।
रैली के बाद प्रदर्शनकारी घंटाघर पहुंचे, जहां उन्होंने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों की सहमति से रैली कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ी। यहां महामहिम राष्ट्रपति के नाम अलग-अलग समाजों के लेटर पैड पर तैयार ज्ञापन अपर कलेक्टर को सौंपा गया। ज्ञापन में UGC के नए नियमों को जनविरोधी और भेदभावपूर्ण बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की गई है।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख संगठन और समाज इस प्रकार हैं:
गरूदारा श्री गुरू सिंघ सभा दमोह
अ्वाल समाज दमोह
करणी सेना परिवार दमोह
केशरवानी (गुप्ता) वैश्य सभा जिला दमोह
पंजाब सिंधी पंचायत दमोह
म.प्र. परशुराम कल्याण बोर्ड ब्राह्मण सभा दमोह
क्षत्रिय करणी सेना दमोह
सर्व ब्राह्मण महासभा दमोह
सर्व ब्राह्मण समाज दमोह
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा दमोह (म.प्र.)
श्री दिगम्बर जैन पंचायत दमोह म.प्र.
असाटी समाज समिति दमोह
सकल हिन्दू समाज जिला दमोह
कायस्थ समाज दमोह
मराठा समाज दमोह
यह बंद पूरे देश में UGC के नए 'Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026' के खिलाफ चल रहे विरोध का हिस्सा है, जिसमें सवर्ण समाज के लोग इसे सामान्य वर्ग के साथ भेदभावपूर्ण मान रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह नियम शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक संतुलन को प्रभावित करेगा तथा बच्चों के भविष्य पर असर डालेगा।
