नकली घी फैक्ट्री का पर्दाफाश: दो भाइयों को किया गिरफ्तार

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मंदसौर, ललित शंकर धाकड़ – मंदसौर शहर में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई ने एक बड़े नकली घी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। शनिवार-रविवार की दरमियानी रात सीतामऊ फाटक क्षेत्र के एक किराए के मकान में चल रही अवैध फैक्ट्री पर छापेमारी की गई, जहां सोयाबीन तेल (या डालडा) में खतरनाक केमिकल्स और आर्टिफिशियल खुशबू मिलाकर 'देसी घी' तैयार किया जा रहा था।
संयुक्त टीम ने मौके से लगभग 150 लीटर नकली घी, भारी मात्रा में सोयाबीन तेल, बड़े-बड़े बर्तन तथा घी में रंग-खुशबू लाने वाले केमिकल जब्त किए। पुलिस ने इस गोरखधंधे में शामिल दो सगे भाइयों गोपाल बागरी और संजय बागरी (पिता अशोक बागरी, निवासी अहमदाबाद, गुजरात) को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
मुखबिर की सूचना पर रात में दबिश
पुख्ता सूचना के आधार पर एसडीएम शिवलाल शाक्य और सीएसपी जितेंद्र कुमार भास्कर के नेतृत्व में सिटी कोतवाली एवं नई आबादी थाना पुलिस ने फूड सेफ्टी विभाग की टीम के साथ संयुक्त छापा मारा। टीम के अंदर प्रवेश करते ही आरोपी तेल उबालकर उसमें केमिकल मिलाते हुए पकड़े गए। जांच में पता चला कि दोनों भाई गुजरात से आकर पिछले 2-3 महीनों से मंदसौर में किराए पर रह रहे थे और मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों के बाजारों को टारगेट कर सस्ते दामों पर नकली घी की सप्लाई कर रहे थे।
सेहत से खिलवाड़, मुनाफे का धंधा
असली देसी घी की बाजार में कीमत 600-700 रुपये प्रति किलो है, जबकि इन आरोपियों द्वारा तैयार किया गया नकली घी मात्र 200 रुपये प्रति किलो में बेचा जा रहा था। कम कीमत के लालच में ग्रामीण लोग अनजाने में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक 'जहर' खरीद रहे थे। यह घी सोयाबीन तेल या डालडा में केमिकल्स मिलाकर बनाया जा रहा था, जो लंबे समय तक सेवन करने पर गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है।
सैंपल जांच के लिए भेजे, नेटवर्क की तलाश जारी
फूड सेफ्टी विभाग ने जब्त घी के सैंपल लैब जांच के लिए भेज दिए हैं। पुलिस अब इस रैकेट के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है – नकली घी किन-किन दुकानों तक पहुंचा, अन्य शहरों या राज्यों से इसके तार कैसे जुड़े हैं और इसमें और कौन-कौन शामिल है।
