गांधी स्मृति सभा: कंचना घाट, बेतवा नदी, ओरछा में बापू को श्रद्धांजलि

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ओरछा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर बुंदेलखंड की जीवन रेखा बेतवा नदी के पावन तट पर स्थित कंचना घाट में गांधी स्मृति सभा का भावपूर्ण आयोजन किया गया। यह ऐतिहासिक स्थल वह स्थान है जहां वर्ष 1948 में गांधीजी की चिता भस्म का विसर्जन किया गया था। प्रतिवर्ष बुंदेलखंड अंचल (उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश) के गांधीजन यहां एकत्र होकर बापू को नमन करते हैं और उनकी विचारधारा की ऊर्जा से प्रेरणा ग्रहण करते हैं।
सभा में झांसी, टीकमगढ़, निवाड़ी और छतरपुर से आए गांधीवादियों ने वर्तमान चुनौतियों के बीच सत्य, अहिंसा और स्वराज के मार्ग पर अटल रहने का संकल्प लिया। गांधी आश्रम छतरपुर के सौजन्य से लगभग 50 साथियों का दल बस द्वारा ओरछा पहुंचा, जिसमें युवाओं और महिलाओं की अच्छी संख्या थी। सभी ने गांधी स्मृति स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की और शहीदों को नमन किया।
ज्येष्ठ गांधीवादी श्री दुर्गा प्रसाद आर्य ने 1948 के अस्थि-विसर्जन के संस्मरण साझा करते हुए इसे बुंदेलखंड का गौरव बताया। श्री दयाराम नामदेव ने वर्तमान परिस्थितियों में गांधी विचारों की प्रासंगिकता पर जोर दिया। श्री प्रेम नारायण मिश्र ने कहा कि नैतिक मूल्यों के संकट के समय महापुरुष जन्म लेते हैं—महात्मा गांधी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं। श्री लाल सिंह गौर ने युवाओं को अधिक से अधिक जोडऩे का आह्वान किया।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन परिवार के श्री शंकर सोनी एवं श्री प्रभात तिवारी ने इसे पूर्वजों की प्रेरणास्थली करार दिया। श्री गिरजा शंकर ने विद्यालयों में प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं को जोडऩे का प्रस्ताव रखा, जिसका स्थानीय निवासी श्री जगदीश तिवारी ने समर्थन किया। श्री सूरज माते ने दो दिवसीय युवा शिविर आयोजित करने की घोषणा की। श्री कृष्ण गांधी ने कहा कि गांधी सदैव प्रासंगिक रहेंगे और आज स्वराज की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।
सभा में श्रीमती प्रतिभा चतुर्वेदी, श्रीमती नीलम पांडे, श्री रमेश चंद्र दुबे, श्री अंकित मिश्रा, श्री प्रमोद सारस्वत, श्री राजेंद्र पालीवाल सहित कई साथियों ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन गांधी स्मारक निधि की सचिव श्रीमती दमयंती पानी ने किया तथा आभार श्री विकास मिश्रा ने व्यक्त किया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार द्वारा सभी गांधीजनों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। बुनकर साथी श्री चतुर्भुज कोरी एवं श्री राहुल द्वारा खादी वस्त्र का स्टॉल भी लगाया गया।
इस पावन अवसर पर राजेश तिवारी राय, प्रतिभा चतुर्वेदी, मकबूल मोहम्मद, राम लखन सिंह राजपूत, बाबूलाल बबेले, अच्छे लाल कुशवाहा, रामकुमार कोरी, बृजेश शर्मा, अभिषेक शर्मा, सरोज कुशवाहा, स्वामी प्रसाद पटेल, अशोक कुमार आर्य, हरिदास कुशवाहा, चंदन कुशवाहा, संतोष गुप्ता, महेश प्रसाद अहिरवार, जुगल किशोर नामदेव, नीलम पांडे, मनीष मिश्रा, सुरेश खरे, विकास मिश्रा, राहुल कोरी, नारायण दास कोरी, दीपक कुमार, प्रमोद सारस्वत, किशोरी भाई, अशोक पालीवाल, रविंद्र स्वामी, राजेंद्र कुमार, योगेंद्र पालीवाल, सूरज माते, रमेश चंद्र दुबे, भगवती नामदेव, अंश सिंह राजावत, आदर्श प्रताप सिंह, अंशिका सिंह राजावत, वर्षा अहिरवार, ऋषिका सिंह राजावत सहित बड़ी संख्या में गांधीजन उपस्थित रहे।
