बुंदेलखंड का ऐतिहासिक गौरव: अजयगढ़ के प्राचीन मंदिर में बसंत पंचमी की धूम

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अजयगढ़ (पन्ना) | आज से प्रकृति के नव-श्रृंगार और ऋतुराज बसंत की शुरुआत हो गई है। पतझड़ के बाद सावन की स्मृतियों और नई कोपलों के साथ जलवायु परिवर्तन का यह उत्सव देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के ही दिन ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। बुंदेलखंड के अजयगढ़ में स्थित ऐतिहासिक सरस्वती मंदिर में इस महापर्व की छटा देखते ही बन रही है।
देश का अद्वितीय सरस्वती मंदिर
अजयगढ़ का यह मंदिर केवल स्थानीय आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि इसकी ख्याति पूरे भारत में है। ऐतिहासिक तथ्यों और जनश्रुति के अनुसार, कोलकाता के प्रसिद्ध सरस्वती मंदिर के बाद अजयगढ़ ही वह स्थान है जहाँ माँ शारदे का इतना प्राचीन और भव्य मंदिर विद्यमान है। यहाँ स्थापित माँ सरस्वती की प्रतिमा अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक है, जिसके दर्शन मात्र से शांति और ज्ञान का आभास होता है।
रियासत कालीन वैभव और प्रशासनिक संरक्षण
इस दिव्य मंदिर का निर्माण अजयगढ़ रियासत के तत्कालीन महाराज पुण्य प्रताप सिंह द्वारा कराया गया था। राजा की माँ सरस्वती के प्रति अटूट श्रद्धा का ही परिणाम है कि आज यह मंदिर क्षेत्र की पहचान बन चुका है। वर्तमान में यह ऐतिहासिक धरोहर शासन के अधीन है और इसकी देखरेख सरकारी तंत्र द्वारा की जाती है। मंदिर की स्थापत्य कला और यहाँ का वातावरण आज भी राजसी काल के वैभव की याद दिलाता है।
आस्था और परंपरा का संगम: विशाल भंडारा आज
बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आज अलसुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। नई ऋतु की शुरुआत और बच्चों के विद्यारंभ संस्कार के लिए लोग दूर-दूर से यहाँ पहुँच रहे हैं। मंदिर की परंपरा के अनुसार, इस दिन विशेष रूप से शुद्ध देशी घी के पकवानों का भोग माँ सरस्वती को लगाया जाता है। पूजन-अर्चन के पश्चात यहाँ एक विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें हजारों भक्त प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और दर्शन की पुख्ता व्यवस्था की गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अजयगढ़ का यह मंदिर उनके लिए केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि विद्या और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।
