उत्तर प्रदेश में भाजपा के शासनकाल में नए कीर्तिमान स्थापित हुए : जयवीर सिंह

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मैनपुरी। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा राज्य के बजट को फेल बताए जाने पर प्रदेश सरकार के मंत्री जयवीर सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता होने के नाते वह यही कहेंगे। मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता होने के नाते अखिलेश यादव को ऐसा कहना ही चाहिए। लेकिन, देश और प्रदेश की जनता महसूस कर रही है कि उनके कार्यकाल में प्रदेश में विकास नहीं हुआ था।
जयवीर सिंह ने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए गए हैं और प्रदेश माफियाराज तथा बीमारू राज्य की छवि से निकलकर देश का ग्रोथ इंजन बना है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव में 2017 से पहले और वर्तमान समय की स्थिति की तुलनात्मक चर्चा कर यह स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश ने विकास की दिशा में लंबी छलांग लगाई है।
जयवीर सिंह ने लोकतंत्र की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि विपक्ष सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों में कमियां बताता है और सुधार के सुझाव भी देता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की प्रदेश और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में विपक्ष अपनी रचनात्मक भूमिका निभाने के बजाय केवल हंगामा और गतिरोध की राजनीति कर रहा है।
समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव द्वारा लोकसभा में बोलने का अवसर न दिए जाने और स्पीकर पर एकपक्षीय रवैया अपनाने के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए जयवीर सिंह ने कहा कि लोकसभा हो या विधानसभा, सदन नियमों, मानकों और परंपराओं के अनुसार चलता है, न कि किसी दल के हल्लाबोल से। उन्होंने कहा कि संसदीय व्यवस्था में अनुशासन और मर्यादा सर्वोपरि है और उसी के अनुरूप कार्यवाही संचालित होती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर दिए गए बयान का जयवीर सिंह ने समर्थन किया। जयवीर सिंह ने कहा कि पूरा देश जानता है कि सनातन संस्कृति की परंपराओं के अनुसार चार पीठों के चार शंकराचार्य होते हैं और उन्हीं पीठों की परिषद यह निर्धारित करती है कि कौन शंकराचार्य बनेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ने यह नहीं कहा कि कौन है या कौन नहीं है, बल्कि उन्होंने परंपराओं की गरिमा और मर्यादा की बात कही है। उन्होंने कहा कि ऐसी परंपराएं हमारी संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए।
