Wednesday, February 4, 2026

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राष्ट्रपति मुर्मू के अभिभाषण से शुरू होगा संसद का बजट सत्र, 2 अप्रैल तक चलेगा सत्र; विपक्ष के हंगामे के आसार

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28 जनवरी 2026, 06:15 am IST
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नई दिल्ली। 18वीं लोकसभा का बजट सत्र बुधवार से शुरू होगा। सत्र की शुरुआत संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से होगी। यह बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जाएगा और 2 अप्रैल तक चलेगा। पूरे सत्र के दौरान कुल 30 बैठकें प्रस्तावित हैं।


बजट सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित होगा। 28 जनवरी और 1 फरवरी को शून्यकाल नहीं होगा। पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और केंद्रीय बजट पर चर्चा प्रमुख एजेंडा रहेगा। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 2 से 4 फरवरी तक तीन दिन निर्धारित किए गए हैं।


इस बार बजट सत्र के हंगामेदार रहने की पूरी संभावना जताई जा रही है। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR), VB-G RAM G कानून, अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ, विदेश नीति, वायु प्रदूषण, आर्थिक स्थिति और किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाएगा।


बजट सत्र के दौरान कई अहम विधेयकों पर भी चर्चा संभव है। लोकसभा में फिलहाल 9 विधेयक लंबित हैं, जिनमें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025, प्रतिभूति बाजार संहिता 2025 और संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024 प्रमुख हैं। ये विधेयक वर्तमान में संसदीय स्थायी या प्रवर समितियों के पास विचाराधीन हैं।


बजट सत्र से पहले 27 जनवरी को ऑल पार्टी मीटिंग आयोजित की गई थी। इस बैठक में विपक्ष ने SIR और VB-G RAM G कानून पर चर्चा की मांग की, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इन मुद्दों पर संसद में पहले ही बहस हो चुकी है और कानून पास होने के बाद उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता।


बैठक के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तीखे आरोप लगाए। शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि प्रदूषण, बेरोजगारी और SIR जैसे कई अहम मुद्दे हैं, जिन पर चर्चा जरूरी है। समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने बजट को संपन्न वर्ग के लिए बताया। वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने विदेश नीति, बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और SIR के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए।

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