मिट्टी में उतरी खजुराहो की विरासत: पत्थरों की नक्काशी को टेराकोटा में मिली नई 'जान'

Advertisement
खजुराहो, आनंद अग्रवाल। विश्व प्रसिद्ध खजुराहो नृत्य महोत्सव में इस वर्ष नृत्य के साथ-साथ शिल्पकला ने भी खास पहचान बनाई। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के मंडला जिले से आए कलाकारों ने खजुराहो मंदिर की चंदेलकालीन कला के लिए प्रसिद्ध मूर्तियों की सुंदर टेराकोटा प्रतिकृतियां बनाकर पर्यटकों और कला प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया।
कलाकारों ने भगवान विष्णु के वराह अवतार सहित अन्य प्रसिद्ध मूर्तियों की बारीक नक्काशी, अलंकरण और भाव-भंगिमाओं को मिट्टी में जीवंत रूप दिया। इन टेराकोटा प्रतिकृतियों में मंदिरों की मूल मूर्तियों की सूक्ष्म शिल्पकला और पारंपरिक शैली को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है।
प्रमुख कलाकार नरेंद्र मिश्रा ने बताया कि वे बचपन से ही मंदिरों की मूर्तियों पर आधारित यह कला करते आ रहे हैं। यह कला उनकी पारंपरिक विरासत से जुड़ी हुई है। खजुराहो की मूर्तियां उन्हें निरंतर प्रेरणा देती हैं, इसी कारण उन्होंने उनकी टेराकोटा प्रतिकृतियां तैयार की हैं।
महोत्सव में पहुंचे देश-विदेश के पर्यटकों और कला प्रेमियों ने इन कलाकृतियों की जमकर सराहना की। कई पर्यटकों ने इन टेराकोटा मूर्तियों को स्मृति-चिह्न के रूप में भी खरीदा। इस तरह नृत्य और शिल्पकला के अनूठे संगम ने खजुराहो महोत्सव को और भी खास और यादगार बना दिया।
