केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित गरीबों का हक मांगने वाले नेता को मिली हथकड़ी...!

समाजसेवी अमित भटनागर को गिरफ्तार करती पुलिस
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छतरपुर। जिले की बिजावर तहसील में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित विस्थापितों और गरीबों के हक की लड़ाई लड़ने वाले समाजसेवी अमित भटनागर को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। प्रशासन ने धारा 151 के तहत यह कार्रवाई की है, जिसे स्थानीय लोग और पीड़ित ग्रामीण दमनकारी नीति करार दे रहे हैं। जब पुलिस के पास जनसेवा और जायज सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं होता, तो अक्सर शांति भंग की धाराओं का सहारा लेकर आवाज़ को दबाने का प्रयास किया जाता है, और यहाँ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है।
विस्थापितों के आंसू पोंछने और उनके पुनर्वास के लिए संघर्ष करने वाले समाजसेवी को सलाखों के पीछे भेजकर प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकास की बड़ी परियोजनाओं के शोर में उसे ग्रामीणों का दर्द सुनाई नहीं दे रहा है। जिस तरह से अमित भटनागर की गिरफ्तारी के लिए धारा 151 का प्रयोग किया गया है, उसने पुलिस और स्थानीय प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। पीड़ितों का कहना है कि यह गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की उम्मीदों को कुचलने की कोशिश है जो अपनी जमीन और घर खोने की कगार पर हैं।
उल्लेखनीय है कि केन-बेतवा परियोजना के डूब क्षेत्र में जी रहे ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि प्रशासन यह भूलने की गलती कतई न करे कि सलाखें किसी की आवाज़ को तो कैद कर सकती हैं, लेकिन जनता के भीतर धधक रहे आक्रोश को नहीं। अमित भटनागर की गिरफ्तारी ने ग्रामीणों के गुस्से में घी डालने का काम किया है। यदि जल्द ही उनकी रिहाई नहीं होती और विस्थापितों की समस्याओं पर सार्थक सुनवाई नहीं की गई, तो यह आक्रोश जल्द ही सड़कों पर एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
जिले के आला अधिकारियों को समय रहते इस मामले का संज्ञान लेना होगा और बिजावर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गौर करना होगा, वरना इस तरह की कार्रवाई पूरी खाकी की छवि को दागदार कर देगी। फिलहाल, क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है और डूब प्रभावित ग्रामीण अपने नेता की रिहाई की मांग को लेकर एकजुट हो रहे हैं।

