अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 21 जनवरी 2026 को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दिए अपने लगभग 75 मिनट के भाषण में ग्रीनलैंड को लेकर अपना रुख नरम किया। पहले वे इसे "हर हाल में हासिल" करने की बात करते थे और मिलिट्री एक्शन की आशंका जताते थे, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे ताकत या फोर्स का इस्तेमाल नहीं करेंगे। ट्रम्प ने कहा, "मैं फोर्स इस्तेमाल नहीं करूंगा। मैं नहीं चाहता कि फोर्स का इस्तेमाल हो। लोग सोचते थे कि मैं फोर्स यूज करूंगा, लेकिन मैं नहीं करूंगा।"
यह बदलाव इसलिए चर्चा में है क्योंकि इससे पहले ट्रम्प ने यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकी दी थी और ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने की जिद दिखाई थी। भाषण के बाद उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि नाटो सेक्रेटरी जनरल मार्क रुट्टे के साथ बैठक में ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र को लेकर "फ्यूचर डील का फ्रेमवर्क" बन गया है। इसके बाद उन्होंने यूरोपीय देशों पर लगने वाले टैरिफ की धमकी वापस ले ली।
यूरोप की सख्ती और विरोध ने प्रभावित किया?
ट्रम्प के इस बदलाव के पीछे यूरोपीय नेताओं और नाटो की एकजुटता को प्रमुख वजह माना जा रहा है। दावोस में ही कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिका के वर्चस्व के अंत की बात कही और कहा कि अब अमेरिका का पुराना ऑर्डर नहीं टिकेगा। उन्होंने मध्यम शक्तियों (मिडिल पावर्स) को एकजुट होकर नए गठबंधन बनाने की सलाह दी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी टैरिफ और दबाव की राजनीति की निंदा की।
यूरोपीय यूनियन और नाटो देशों ने ग्रीनलैंड में अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं। डेनमार्क ने करीब 150 सैनिक भेजे, जबकि नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड्स और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी सपोर्ट दिया। नाटो के आर्टिकल-5 के तहत किसी एक सदस्य पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। ट्रम्प की धमकी से नाटो में बंटवारे का खतरा बढ़ गया था, जिससे अमेरिका को यूरोपीय सहयोगियों से रिश्ते बिगड़ने और ट्रेड पर अरबों डॉलर का नुकसान होने का डर था।
अमेरिका में भी विरोध और रणनीतिक सोच
अमेरिका के अंदर भी ट्रम्प की इस पॉलिसी का विरोध हुआ। रॉयटर्स-इप्सोस सर्वे में सिर्फ 17% अमेरिकियों ने ग्रीनलैंड कब्जाने का समर्थन किया। रिपब्लिकन नेता मिच मैकोनेल ने इसे "रणनीतिक आत्मघाती कदम" बताया। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ और थिंकटैंक्स जैसे काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस ने चेतावनी दी कि इससे यूरोपीय रिश्ते बिगड़ेंगे और ट्रेड प्रभावित होगा।
ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को रूस-चीन के खतरे से बचाने की बात कही, लेकिन यूरोपीय देशों का कहना है कि अमेरिका पहले से ही वहां पिटुफिक स्पेस बेस संचालित करता है और 1951 के समझौते से रक्षा की जिम्मेदारी है। फोर्स से कब्जा UN चार्टर के खिलाफ होगा।

