जब कैदी जेल आते है तो अंगूठा लगाते है और जब छूटते तो हस्ताक्षर करके

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सतना,अंबिका केशरी। सेंट्रल जेल में कैदियों के जीवन में सुधार और समाज के पुनर्वास में शिक्षा शक्ति को दर्शाने के लिए लगातार कई प्रयास किए जा रहे है। यहीं वजह है कि यहां आने वाला निरक्षर कैदी जब बाहर जाता है तो वह कई प्रकार के ज्ञान व साक्षार होकर जाता है। जेल प्रबंधन द्वारा कैदियों के लिए इस प्रकार के तरह-तरह के इंतजाम किए गए है। आज हम बात कर रहे केंद्रीय जेल सतना में संचालित पुस्तकालय की। जहां पर बंदियों के लिए चार-पांच प्रकार की अलग-अलग पुस्तकें रखी गई हैं। जिसमें धार्मिक, मनोरंजक, ज्ञान वर्धक सहित कुछ पुस्तके ऐसी रखी गई है जो महान व्यक्तियों द्वारा लिखी गई है। इन्हीं पुस्तकों को पढकर यहां के कैदी साक्षर होकर जेल से निकलते है और अपना नाम तक लिखना सीख जाते है। जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है और अपराध दर कम होती है। बता दें कि इस पुस्तकालय के संचालन के लिए शासन की ओर से एक शासकीय टीचर की नियुक्ति की गई है और उनकी सहायता के लिए दो-तीन बंदियों की ड्यूटी भी लगाई है। बंदी पुस्तकालय से पुस्तक प्राप्त करने के लिए सबसे पहले रजिस्टर में एंट्री करता है और फिर उन्हे सात दिन के लिए पुस्तक प्रदान की जाती है। डिप्टी जेलर सोनवीर सिंह कुशवाह ने बताया कि निरक्षर कैदियों को साक्षार करने का यह एक जेल प्रबंधन का यह एक अनूठा प्रयास है। उन्होंने बताया कि 80 प्रतिशत बंदी जब जेल आते है तो अंगूठा लगाते है, लेकिन उन्हें बाद में इतना पढा-लिखा दिया जाता है कि जब वे छूटते है तो वो हस्ताक्षर करते छूटते है। डिप्टी जेलर ने बताया कि जेल के अंदर इग्नू का सेंटर भी संचालित होता है। जिसके माध्यम से बंदी जेल के अंदर ही पढ-लिखकर परीक्षा उत्तीर्ण करते है। जिसके सफलता का औसत सौ प्रतिशत है। कुल मिलाकर शासन की एक विशेष मंशा है कि पुस्कालय के माध्यम से निरक्षर कैदी जेल से बाहर निकलने के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड सकें और अपराध की ओर दोबारा न मुडें और आत्मनिर्भर बने।
