मध्यप्रदेश के इस IAS ने रचाई तीसरी शादी, प्रशासनिक गलियारों में छिड़ी नई बहस...!

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी अवि प्रसाद एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चाओं के केंद्र में हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर के रहने वाले अवि प्रसाद ने 11 फरवरी को एक सादगीपूर्ण समारोह में तीसरी बार वैवाहिक सूत्र में बंधने का फैसला किया। उनकी नई जीवनसाथी 2017 बैच की आईएएस अधिकारी अंकिता धाकरे बनी हैं, जो वर्तमान में राज्य मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर अपनी सेवाएँ दे रही हैं। इस खास पल के लिए उन्होंने चीतों के संरक्षण के लिए देशभर में मशहूर कूनो नेशनल पार्क को चुना। सोशल मीडिया पर इस शादी की तस्वीरें वायरल होते ही प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच उनकी निजी जिंदगी को लेकर बहस छिड़ गई है।
IPS से IAS तक का शानदार करियर
अवि प्रसाद का पेशेवर सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। साल 2013 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में जगह बनाई थी, लेकिन उनके इरादे और भी ऊंचे थे। उन्होंने दोबारा मेहनत की और 2014 की सिविल सेवा परीक्षा में देशभर में 13वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का गौरव प्राप्त किया। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश रोजगार गारंटी परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के पद पर तैनात हैं। इससे पहले कटनी कलेक्टर के रूप में कुपोषण के खिलाफ उनके द्वारा चलाए गए सख्त अभियान और आंगनवाड़ी नेटवर्क के सुधार की राज्य स्तर पर काफी सराहना हुई थी।
पिछली शादियों और करियर की जुगलबंदी
अवि प्रसाद की पहली शादी उनकी तैयारी के दिनों की साथी और वर्तमान शाजापुर कलेक्टर रिजु बाफना से हुई थी। दिल्ली में सिविल सेवा की तैयारी के दौरान शुरू हुआ यह रिश्ता प्रशासनिक व्यस्तताओं और आपसी मतभेदों के चलते ज्यादा लंबा नहीं चल सका और दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया। इसके बाद उनकी दूसरी शादी 2016 बैच की आईएएस अधिकारी मिशा सिंह से हुई, जो वर्तमान में रतलाम कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। करीब चार साल साथ रहने के बाद यह वैवाहिक बंधन भी टूट गया।
प्रशासनिक जगत में चर्चा और कार्यशैली
अपनी तीसरी शादी को लेकर अवि प्रसाद ने फिलहाल कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग उनके इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं। प्रशासनिक हलकों में अवि प्रसाद को एक 'फील्ड-ओरिएंटेड' अधिकारी माना जाता है, जो कागजी कार्रवाई से ज्यादा जमीनी स्तर पर जाकर समस्याओं को सुलझाने में यकीन रखते हैं। अब अंकिता धाकरे के साथ उनकी इस नई पारी को लेकर उनके शुभचिंतक उन्हें बधाई दे रहे हैं, वहीं आलोचक उनके लगातार बदलते रिश्तों पर सवाल उठा रहे हैं।
