मालती के लिए 'देवदूत' बने रक्तवीर अमित: विशाखापट्टनम से कार्गो विमान में आया दुनिया का सबसे दुर्लभ 'बॉम्बे पॉजिटिव' ब्लड

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छतरपुर/ग्वालियर। कहते हैं कि जब इरादे नेक हों, तो कुदरत भी रास्ता बना देती है। छतरपुर के दौरिया गांव की मालती पाल के लिए बीते कुछ दिन किसी भयावह सपने से कम नहीं थे, लेकिन 'रक्तवीर सेवादल' के जज्बे और आधुनिक तकनीक के तालमेल ने उन्हें मौत के मुंह से खींच लिया। जिला अस्पताल की एक अक्षम्य लापरवाही ने एक प्रसूता को जिंदगी और मौत के बीच लाकर खड़ा कर दिया था, जिसे बचाने के लिए विशाखापट्टनम से ग्वालियर तक 'मिशन लाइफ' चलाया गया।
अस्पताल की लापरवाही: गलत ब्लड ग्रुप ने बिगाड़ा खेल
मामला तब शुरू हुआ जब मालती पाल ने जिला अस्पताल में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। खुशियों का माहौल तब गम में बदल गया जब मालती की ब्लीडिंग रुकना बंद हो गई। 1 मार्च को उनके पति दीपक ने खुद रक्तदान किया। अस्पताल के ब्लड बैंक ने जांच के बाद ग्रुप 'ओ पॉजिटिव' बताकर वही खून मालती को चढ़ा दिया। यहीं से बर्बादी शुरू हुई; गलत खून चढ़ते ही रिएक्शन हुआ और मालती का पूरा शरीर इंफेक्शन की चपेट में आ गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल ग्वालियर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
खुलासा: ओ पॉजिटिव नहीं, 'बॉम्बे पॉजिटिव' है मालती का खून
ग्वालियर में जब गहन जांच हुई, तो डॉक्टरों के साथ-साथ परिजनों के भी होश उड़ गए। मालती का ब्लड ग्रुप 'ओ पॉजिटिव' नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे दुर्लभ 'बॉम्बे पॉजिटिव' (hh blood group) था। गलत खून चढ़ने की वजह से उनका ब्लड पूरी तरह इंफेक्टेड हो चुका था और किडनी पर असर पड़ने के कारण उन्हें डायलिसिस की जरूरत आन पड़ी। मालती को बचाने के लिए अब केवल 2 यूनिट 'बॉम्बे पॉजिटिव' खून ही एकमात्र उम्मीद थी।
अमित जैन का मिशन: विशाखापट्टनम से ग्वालियर तक की दौड़
जब उम्मीदें दम तोड़ रही थीं, तब छतरपुर के 'रक्तवीर सेवादल' के अमित जैन ने मोर्चा संभाला। देशभर के ब्लड बैंकों और डोनर्स नेटवर्क को खंगालने के बाद पता चला कि यह दुर्लभ खून आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में उपलब्ध है। समय रेत की तरह फिसल रहा था, इसलिए सड़क या ट्रेन का रास्ता चुनना जोखिम भरा था। गुरुवार सुबह कार्गो विमान सेवा के जरिए रक्त की यूनिट्स को विशाखापट्टनम से उड़ाया गया और वे सीधे ग्वालियर मेडिकल कॉलेज पहुँचीं। फिलहाल मालती का इलाज जारी है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर पल-पल नजर बनाए हुए है।
क्या है बॉम्बे पॉजिटिव ब्लड?
यह दुनिया का सबसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप है, जो प्रति 10 लाख लोगों में से मुश्किल से 4 या 5 लोगों में पाया जाता है। इसकी खोज 1952 में मुंबई (तब बॉम्बे) में हुई थी। इस ग्रुप वाले व्यक्ति को केवल बॉम्बे पॉजिटिव ग्रुप का ही खून चढ़ाया जा सकता है, अन्यथा शरीर इसे स्वीकार नहीं करता और जानलेवा रिएक्शन हो जाता है।


