Thursday, October 8, 2026

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विराट कोहली का महा-रिकॉर्ड: सचिन को पीछे छोड़ बने सबसे तेज 15 हजारी

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इजरायल-ईरान जंग से जुड़ी सभी खबरें

ईरान संघर्ष और बजट को लेकर हेगसेथ से सांसदों ने पूछे तीखे सवाल

ईरान संघर्ष और बजट को लेकर हेगसेथ से सांसदों ने पूछे तीखे सवाल

वाशिंगटन, 1 मई । सीनेट में ईरान संघर्ष पर सुनवाई के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और सांसदों के बीच तीखी बहस हुई। ईरान संघर्ष के अलावा बढ़ते खर्च और प्रस्तावित 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट को लेकर मतभेद बढ़ा। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान संघर्ष के बाद पहली बार संसद में डेमोक्रेटिक सांसदों के सवालों का सीधा सामना किया। लगभग छह घंटे की सुनवाई के दौरान हेगसेथ ने शपथ के तहत सवालों का सामना करते हुए डेमोक्रेटिक सांसदों के साथ बहस की। वो हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने पेश हुए थे। जहां डेमोक्रेटिक और कुछ निर्दलीय सांसदों ने ईरान में प्रशासनिक सफलता के दावों को चुनौती दी और मिलिट्री खर्च के स्केल पर सवाल उठाए। उनके साथ ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डेन केन और रक्षा मंत्रालय के मुख्य वित्त अधिकारी जूल्स हर्स्ट भी मौजूद थे। रैंकिंग मेंबर जैक रीड ने पीट से सवाल पूछने की शुरुआत की। आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना किसी रणनीति के एक "गलत" लड़ाई में उतरने का आरोप लगाया। रीड ने कहा, "आज, हमारा देश युद्ध की रणनीतिक स्थिति में है।" उन्होंने हताहतों की संख्या, बुनियादी ढांचों को पहुंचे नुकसान और आर्थिक नतीजों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक जीत के दावे "खतरनाक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर" किए गए थे। इस आरोप को हेगसेथ ने सिरे से खारिज कर दिया, यह दावा करते हुए कि अभियान असरदार रहा। उन्होंने कहा, "हमारी सेना ने जो हासिल किया वह अभूतपूर्व रहा," और तर्क दिया कि ईरान की रक्षा क्षमताएं काफी हद तक कम हो गई हैं। इस बातचीत ने एक तीखी बहस का रूप ले लिया। जिसमें सीनेटरों ने बार-बार डिफेंस चीफ पर लागत और नतीजों को लेकर आरोप लगाए और सवाल पूछते रहे। सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने कहा कि अमेरिकी नागरिक युद्ध के आर्थिक असर को लेकर "गुस्से में" थे, उन्होंने बढ़ते ईंधन रेट और खाने-पीने की बढ़ती कीमतों का हवाला दिया। उन्होंने सवाल किया कि, "आखिर हम अमेरिकी नागरिकों से इस युद्ध के लिए और कितना भुगतान चाहते हैं?" हेगसेथ ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ईरान के न्यूक्लियर इरादों का मुकाबला करने के लिए यह मिशन जरूरी था। जिसके जवाब में गिलिब्रैंड बोले, "न्यूक्लियर हथियारों से लैस ईरान की कीमत आखिर क्या है?" सीनेटर मार्क केली ने मिलिट्री ऑपरेशन के स्तर और अमेरिकी हथियारों के स्टॉक पर पड़ने वाले दबाव के बारे में चिंता जताई। केली ने कहा, "यह जंग रुकी हुई है, होर्मुज स्ट्रेट बंद है और यह साफ नहीं है... कि इस जंग का मकसद क्या है।" हेगसेथ ने कहा कि मिलिट्री ने अपने मकसद हासिल कर लिए हैं और तेजी से अपनी क्षमता फिर से बना रही है। आम लोगों के मारे जाने और लड़ाई के नियमों को लेकर भी तनाव बढ़ गया। सीनेटर गिलिब्रैंड ने स्कूलों और अस्पतालों पर हमलों की रिपोर्ट पर सवाल उठाए, और आम लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपायों के बारे में पूछा। हेगसेथ ने कहा कि यूएस मिलिट्री "कभी भी आम लोगों को टारगेट नहीं करती" और नुकसान को कम करने के लिए बड़े कदम उठाती है। सीनेटर टिम केन ने लड़ाई के बारे में कानूनी चिंताएं जताईं, वॉर पावर्स रेजोल्यूशन का जिक्र किया और पूछा कि क्या प्रशासन कांग्रेस से मंजूरी मांगेगा। हेगसेथ ने कहा कि सीजफायर का मतलब है “60-दिन की घड़ी का रुकना।” बजट के मुद्दों ने टकराव को और बढ़ा दिया। सीनेटर केली ने सवाल किया कि क्या 1.5 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा सही था; उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि कभी-कभी लगता है कि ये हवाई था। हेगसेथ ने जवाब दिया कि यह संख्या एक “बहुत सख्त प्रक्रिया” का नतीजा थी जो ग्लोबल खतरों और वर्षों के अल्प निवेश को दिखाती है। सांसदों ने युद्ध की लागत के बारे में पेंटागन पर भी दबाव डाला। डिफेंस कंट्रोलर जूल्स हर्स्ट ने 25 बिलियन डॉलर के शुरुआती अनुमान की पुष्टि की, हालांकि कई सीनेटरों ने तर्क दिया कि असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। पूरी सुनवाई के दौरान, जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन डैन केन ने अधिकतर राजनीतिक विवादों से परहेज किया, और "बिना किसी पार्टी के मिलिट्री सलाह” देने में अपनी भूमिका पर ही बल दिया। इस बहस ने यूएस मिलिट्री स्ट्रैटेजी, ईरान संघर्ष और डिफेंस खर्च के पैमाने को लेकर वाशिंगटन में बढ़ते मतभेदों को उजागर किया।

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ट्रंप का दावा-ईरान हुआ कमजोर, करना चाहता है समझौता

ट्रंप का दावा-ईरान हुआ कमजोर, करना चाहता है समझौता

वॉशिंगटन, 1 मई । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान काफी कमजोर हो गया है और बातचीत के लिए उत्सुक है। हालांकि उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव अब भी बना हुआ है।ट्रंप ने कहा, ईरान समझौता करने के लिए बेताब है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि तेहरान “परमाणु शक्ति नहीं बन सकता।” उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा, “उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है। उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है… उनके ड्रोन कारखाने लगभग 82 प्रतिशत तक घट गए हैं।” ट्रंप ने जोड़ा कि ईरान के मिसाइल उत्पादन पर भी असर पड़ा है। उन्होंने कहा, “उनके मिसाइल कारखाने लगभग 90 प्रतिशत तक कम हो गए हैं।” उन्होंने अमेरिकी अभियान को निर्णायक बताया। उन्होंने कहा कि हमने उनकी परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। ट्रंप ने ईरान के भीतर नेतृत्व अस्थिरता का भी संकेत दिया। उन्होंने कहा, “हमारे सामने एक समस्या है क्योंकि किसी को ठीक-ठीक नहीं पता कि नेता कौन हैं।” जारी तनाव के बावजूद उन्होंने अमेरिका के मजबूत आर्थिक संकेतकों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि आज हमने शेयर बाजार में एक नया उच्च स्तर छुआ है। ट्रंप ने कहा कि बातचीत की स्थिति के बारे में केवल सीमित लोगों को जानकारी है। मेरे और कुछ अन्य लोगों के अलावा किसी को नहीं पता कि बातचीत क्या है। उन्होंने संकेत दिया कि आर्थिक दबाव अमेरिकी रणनीति का मुख्य हिस्सा बना हुआ है। उन्होंने कहा, “उन्हें तेल से कोई पैसा नहीं मिल रहा… नाकाबंदी बेहद कड़ी है।” ट्रंप ने इस संघर्ष को परमाणु प्रसार रोकने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि आप ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दे सकते। ईरान की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और उनकी अर्थव्यवस्था गिर रही है। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजारों, खासकर तेल की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण है, जो मध्य पूर्व में घटनाक्रम से प्रभावित होती हैं। भारत, जो ऐतिहासिक रूप से ईरान से तेल आयात करता रहा है, ऐसे घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखता है क्योंकि इनका ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।

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ईरानी विदेश मंत्री ने लेबनान पर इजरायली हमलों को बताया 'क्रूर'

ईरानी विदेश मंत्री ने लेबनान पर इजरायली हमलों को बताया 'क्रूर'

तेहरान, 1 मई । ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और लेबनान की संसद के स्पीकर नबीह बेरी ने लेबनान के खिलाफ इजरायल की “आक्रामक” कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है।ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने फोन पर बातचीत के दौरान लेबनान और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता और अन्य आपसी मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने दक्षिणी लेबनान में इजरायल की “क्रूर” कार्रवाइयों को रोकने के लिए वैश्विक प्रयासों की अपील की। बयान के मुताबिक, इन हमलों में हजारों लोग मारे गए और घायल हुए हैं, कई रिहायशी इलाकों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। उन्होंने द्विपक्षीय परामर्श और समन्वय जारी रखने पर भी सहमति जताई। अराघची ने कहा कि लेबनान के खिलाफ इजरायल की “आक्रामकता” को रोकना ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम समझौते का हिस्सा है, और भविष्य में किसी भी कूटनीतिक प्रक्रिया में ईरान इस मुद्दे को महत्व देगा। वहीं, नबीह बेरी ने लेबनान में इजरायल की कार्रवाई के लिए उसे जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया। इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम 16-17 अप्रैल की मध्यरात्रि से लागू हुआ, जो कई हफ्तों तक चली सीमा-पार झड़पों के बाद संभव हुआ। 23 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि मौजूदा 10 दिन का युद्धविराम तीन हफ्तों के लिए बढ़ाया जाएगा। एक अलग बातचीत में, अराघची ने अपने स्विस समकक्ष इग्नाज़ियो कासिस से कहा कि क्षेत्रीय समुद्री मार्गों, खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में असुरक्षा, अमेरिका और इजरायल की “आक्रामकता” का सीधा परिणाम है। कासिस ने युद्ध समाप्त करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीति का समर्थन करने की अपनी देश की नीति दोहराई। इसी बीच, लेबनान में अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में कहा कि वह लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच संभावित बैठक का समर्थन करता है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए थे, जिनमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, वरिष्ठ कमांडर और आम नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में, ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा कर दिया। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्धविराम 8 अप्रैल से लागू हुआ, जिसके बाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच लंबी वार्ताएं हुईं, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अमेरिका ने जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी का ऐलान किया।

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ईरान के सर्वोच्च नेता ने फारस की खाड़ी में 'अमेरिका बिना नई शुरुआत' का किया दावा

ईरान के सर्वोच्च नेता ने फारस की खाड़ी में 'अमेरिका बिना नई शुरुआत' का किया दावा

तेहरान, 30 अप्रैल । ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में “नई शुरुआत” हो रही है और इसका भविष्य “अमेरिका के बिना” तय होगा। राज्य मीडिया के जरिए जारी बयान में खामेनेई ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक “नया अध्याय” उभर रहा है। उन्होंने इसे अमेरिका की “नाकामी” से जोड़ते हुए कहा कि क्षेत्र में दो महीने तक चले बड़े अभियान और आक्रामक कार्रवाई के बाद यह स्थिति बनी है। यह संदेश इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) द्वारा ‘नेशनल पर्शियन गल्फ डे’ के मौके पर जारी किया गया। यह दिन 1622 में पुर्तगाली सैनिकों को होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकाले जाने की याद में मनाया जाता है। खामेनेई ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य सदियों से बाहरी ताकतों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है और कई देशों ने यहां प्रभाव जमाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि फरवरी के अंत से ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की ओर से शुरू की गई जंग के दौरान ईरानी लोगों ने अपने बलों की “दृढ़ता, सतर्कता और साहस” को करीब से देखा है। उन्होंने दावा किया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र का उज्ज्वल भविष्य बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त होगा और यह अपने लोगों की प्रगति, सुविधा और समृद्धि के लिए काम करेगा। उनके अनुसार, यह बदलाव क्षेत्रीय देशों के हित में होगा और स्थानीय ताकतों की भूमिका को मजबूत करेगा। गौरतलब है कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। इस क्षेत्र में लंबे समय से अमेरिका की सैन्य और रणनीतिक मौजूदगी रही है, जबकि ईरान लगातार इसका विरोध करता आया है। हालिया बयान ऐसे समय में आया है जब अस्थायी संघर्ष विराम के बीच भी शांति वार्ता को लेकर असमंजस बरकरार है और ओपेक से यूएई ने खुद को अलग कर लिया है। क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। अमेरिकी नाकेबंदी के बीच ईरान के होर्मुज न खोलने के दावे ने दुनिया में उथल-पुथल मचा रखी है। क्रूड ऑयल के दाम में इजाफा हो रहा है, जिससे कई देश अपने भविष्य को लेकर सशंकित हैं।

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अमेरिकी ‘नाकेबंदी’ रणनीति विफल, खाड़ी में बढ़ेगा तनाव: ईरान

अमेरिकी ‘नाकेबंदी’ रणनीति विफल, खाड़ी में बढ़ेगा तनाव: ईरान

तेहरान, 30 अप्रैल । ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने अमेरिकी प्रशासन की कथित नौसैनिक नाकेबंदी रणनीति को विफल और भ्रामक करार देते हुए कहा है कि इससे न तो ईरान पर दबाव बढ़ेगा और न ही क्षेत्र में स्थिरता आएगी, बल्कि फारस की खाड़ी में तनाव और बढ़ेगा। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट कहा कि किसी भी प्रकार की समुद्री नाकेबंदी अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और “विफल होकर ही रहेगी”। तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा कि ऐसे कदम क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के बजाय तनाव बढ़ाते हैं और स्थायी शांति को बाधित करते हैं। पर्शियन गल्फ नेशनल डे के अवसर पर अपने संदेश में, पेजेश्कियन ने इस रणनीतिक जलमार्ग को ईरानियों की राष्ट्रीय पहचान का एक अभिन्न अंग और ईरान की संप्रभुता का प्रतीक बताया। वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर एमबी गालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के बयानों पर तंज कसते हुए कहा कि “तीन दिन बीत गए, कोई तेल कुआं नहीं फटा। इसे 30 दिन तक बढ़ाकर लाइव भी दिखाया जा सकता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रशासन को गलत सलाह दी जा रही है, जिससे तेल कीमतों में उछाल आया है और स्थिति और जटिल हो रही है। इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहने पर ईरान का तेल ढांचा “तीन दिनों में फट सकता है।” वहीं, बेसेंट ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिकी ‘ब्लॉकेड’ के चलते ईरान का तेल उत्पादन ठप होने की कगार पर है और जल्द ही पेट्रोल की कमी हो सकती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और फारस की खाड़ी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल निर्यात होता है। संयुक्त अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव, विशेषकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को लेकर, अक्सर इस क्षेत्र में टकराव का कारण बने हैं। नौसैनिक नाकेबंदी न केवल क्षेत्रीय स्थिरता, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर भी गंभीर असर डाल रही है।

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