नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों के मामले में सोमवार को स्पष्ट किया कि गंभीर आपराधिक इतिहास वाले लोगों बख्शा नहीं जाएगा। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और अन्य राज्यों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे बंद करने की भी छूट दी। विरोध प्रदर्शनों में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा, "यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि ज्यादती करने वाले पुलिस अधिकारी या प्रदर्शनकारियों के बीच आने वाले किसी आपराधिक तत्व को बख्शा जाएगा।" कोर्ट ने कहा कि वह पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों की जांच के लिए पुलिस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाने या किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली समिति बनाने पर विचार कर रहा है। बेंच ने टिप्पणी की, "हमारे मन में दो बातें हैं। एक तो जांच के लिए पुलिस अधिकारियों की एसआईटी बनाना या किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली समिति बनाना।" याचिकाकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया। इसके बाद बेंच ने कहा कि वह एक व्यापक प्रोटोकॉल तय करेगी कि इनका इस्तेमाल कब और कैसे किया जा सकता है। बेंच ने कहा, "हम एक पूरा प्रोटोकॉल बनाना चाहते हैं कि इसका इस्तेमाल कैसे और कहाँ किया जा सकता है।" कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली (एनसीटी) और कोई भी अन्य राज्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर बंद करने या वापस लेने के लिए स्वतंत्र है। इसके साथ ही, बेंच ने अपने 28 जुलाई के आदेश को स्पष्ट किया, जिसमें कहा गया था कि पुलिस आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमा जारी रख सकती है। कोर्ट ने साफ किया कि 'आपराधिक रिकॉर्ड' शब्द का मतलब गंभीर और जघन्य अपराधों से है। आखिरकार, कोर्ट ने कोई भी आदेश देने से पहले अलग-अलग राज्यों से जवाब का इंतजार करने का फैसला किया। कोर्ट ने इस मामले पर विचार करने के लिए 18 अगस्त की तारीख तय की।
छत्रपति संभाजीनगर। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार को केंद्र सरकार, शिक्षा व्यवस्था, छात्र आंदोलनों, राजनीतिक दलों और अपनी संगठनात्मक रणनीति के बारे में समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात की। उन्होंने कहा कि उनका संगठन किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था (सिस्टम) के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। जहां भी छात्रों और शिक्षा से जुड़े मुद्दे सामने आएंगे, उनकी टीम वहां मौजूद रहेगी। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से शिक्षा के मुद्दे पर कहा कि यह केवल किसी एक राज्य की समस्या नहीं है बल्कि लगभग पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है। छात्र निराश हैं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। जहां भी शिक्षा से जुड़ा कोई मुद्दा उठेगा, उनका संगठन छात्रों के साथ खड़ा रहेगा और उनकी आवाज बुलंद करेगा। उन्होंने विपक्षी दलों के कमजोर होने के पीछे प्रवर्तन एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों के खिलाफ किया गया। उदाहरण देते हुए उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति का जिक्र किया और कहा कि राज्य के दो बड़े विपक्षी दल शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) दोनों में विभाजन हुआ। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाओं ने विपक्ष को कमजोर किया है। लोकतंत्र की कार्यप्रणाली पर अपनी राय रखते हुए दीपके ने कहा कि जब नागरिक अपनी चिंताएं व्यक्त करते हैं तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनकी बात सुने और उस पर कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सर्वोपरि होती है और यदि बड़ी संख्या में छात्र किसी मंत्री को हटाने की मांग कर रहे हैं तो सरकार को उस मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। हालांकि, यह उनका व्यक्तिगत राजनीतिक मत है। अभिजीत दिपके ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संगठन किसी विशेष राजनीतिक दल की आलोचना करने या बचाव करने के उद्देश्य से काम नहीं करता। यदि छात्र किसी भी सरकार के कार्यकाल में समस्याओं का सामना करेंगे, तो उनका संगठन सत्ता में मौजूद किसी भी दल के खिलाफ आवाज़ उठाएगा। मुख्यमंत्री या शिक्षा मंत्री चाहे किसी भी पार्टी से हों, उन्हें छात्रों के हितों को प्राथमिकता में रखना होगा। अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्हें किसी सामाजिक या ऐतिहासिक नेता से तुलना पसंद नहीं है। उन्हें "अन्ना" या "गांधी" जैसे संबोधनों से न पुकारा जाए और वे स्वयं को उसी पहचान के साथ देखना चाहते हैं, जिसे उन्होंने अपनाया है। राजनीतिक दलों से संपर्क के सवाल पर दिपके ने बताया कि हाल के दिनों में खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने किसी से बातचीत नहीं की। हालांकि उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा उनसे मिलने आए थे और उन्होंने बताया कि वे राहुल गांधी की ओर से समर्थन का संदेश लेकर आए हैं। कांग्रेस के कई सांसदों ने भी उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से भी समर्थन मांगा था और उनका प्रयास विभिन्न राजनीतिक दलों से संवाद बनाए रखने का रहा है। नई राजनीतिक पार्टी और चुनावी राजनीति को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल देश को एक "पब्लिक प्रेशर ग्रुप" की जरूरत है। उन्होंने आपातकाल (इमरजेंसी) का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल चुनाव लड़ना हर समस्या का समाधान नहीं होता। जब लोकतंत्र पर खतरा महसूस होता है तो व्यापक जन-आंदोलन की आवश्यकता होती है। इसी कारण फिलहाल उनका फोकस जनदबाव और जनभागीदारी के माध्यम से बदलाव लाने पर है। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था की उसकी कमियों के खिलाफ है। वर्तमान में केंद्र में भाजपा की सरकार होने के कारण उनके आंदोलन का विरोध वर्तमान सरकार के खिलाफ रहा। यदि भविष्य में कोई अन्य दल सत्ता में होगा और वही समस्याएं बनी रहेंगी तो उनका संगठन उस दल के खिलाफ भी आवाज उठाएगा। संवाद और आंदोलन की रणनीति पर दिपके ने कहा कि जहां बातचीत से समाधान निकल सकता है, वहां सरकार और विपक्ष दोनों से संवाद किया जाएगा। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता है तो उनका संगठन लोकतांत्रिक तरीके से जन-आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेगा। अपने आंदोलन के दौरान असामाजिक तत्वों की मौजूदगी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही आशंका जताई थी कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहरी तत्व भेजे जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के शुरुआती एक महीने तक ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उन्होंने दिल्ली पुलिस के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें बड़ी संख्या में अपराधियों की मौजूदगी की बात कही गई थी। दिपके ने पूछा कि यदि इतने अपराधी मौजूद थे तो उन्हें वहां रहने की अनुमति किसने दी और सुरक्षा व्यवस्था में यह चूक कैसे हुई। कानूनी मामलों पर उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, कम से कम उनकी सुनवाई तो होनी ही चाहिए। किसी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं तो कानून के अनुसार मुकदमा चलना चाहिए लेकिन न्यायिक प्रक्रिया समय पर पूरी होनी भी आवश्यक है। अपने संगठन के भविष्य को लेकर दिपके ने बताया कि उनकी प्राथमिकता सबसे पहले अपनी टीम को फिर से संगठित करना है। आंदोलन की शुरुआत केवल 10 से 20 लोगों के साथ हुई थी लेकिन अब स्वयंसेवकों (वॉलंटियर्स) की संख्या 300 से अधिक हो गई है। वे पहले सभी स्वयंसेवकों से फीडबैक लेंगे, यह समझेंगे कि आंदोलन के दौरान क्या बेहतर किया जा सकता था और किन गलतियों से बचा जा सकता था। इसके बाद संगठन की आगे की दिशा और संरचना पर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा। विदेश से भारत लौटने के अपने फैसले पर दिपके ने कहा कि जब वे अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे, तब सभी लोग उन्हें एक भारतीय छात्र के रूप में जानते थे। उन्होंने कहा कि उनके प्रोफेसर और मित्र उन्हें भारत के प्रतिनिधि के रूप में देखते थे लेकिन उन्हें यह जानकर दुख हुआ कि अपने ही देश में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया। इस अनुभव ने उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित किया और इसी कारण वे वापस लौटे।
दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पेलेट गन के इस्तेमाल के मुद्दे पर केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग किए जाने के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने भी इसका पुरजोर समर्थन किया है। छत्रपति संभाजीनगर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए दीपके ने कहा कि 20 जुलाई को छात्रों के 'संसद मार्च' के दौरान बल प्रयोग का आदेश केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ही दिया होगा, इसलिए उन्हें अपने पद से तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। सीजेपी (CJP) को बाहर से चंदा मिलने और आंदोलन को विदेश से संचालित करने के आरोपों पर तीखा प्रहार करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि ऐसा है तो यह सीधे तौर पर गृहमंत्री की नाकामी को उजागर करता है। उन्होंने सवाल उठाया, "अगर सीजेपी को बाहर से चलाया जा रहा है, तो फिर अमित शाह किस तरह के 'चाणक्य' हैं? 20 जुलाई को छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग का आदेश किसी और ने नहीं बल्कि अमित शाह ने ही जारी किया होगा।" देश के वर्तमान राजनीतिक माहौल पर चिंता जताते हुए दीपके ने कहा कि लोकतंत्र बचाना अब केवल राजनीतिक विपक्ष का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसके लिए देश की आम जनता को एकजुट होना होगा। जांच एजेंसियों का दुरुपयोग: शिवसेना और एनसीपी (NCP) जैसी प्रमुख पार्टियों को तोड़ने के लिए ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया गया। संस्थानों का कर्तव्य: देश की संवैधानिक और बड़ी संस्थाओं की जिम्मेदारी लोकतंत्र को जीवित रखने की थी, न कि किसी एक व्यक्ति की तानाशाही को बढ़ावा देने की। न्यायपालिका पर टिप्पणी: उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में न्यायपालिका की भूमिका पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किए जाने पर भी सीजेपी प्रमुख ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के बाद एक और विवादित व्यक्ति को कमान सौंप दी गई है। उन्होंने सरकार पर अपराधियों और बलात्कारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि इनके शासनकाल में राम रहीम जैसे लोग बार-बार पैरोल पर बाहर आते हैं। उल्लेखनीय है कि कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में विशाल छात्र आंदोलन आयोजित किया गया था। इस आंदोलन में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने और तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई थी। प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इस आंदोलन का नेतृत्व करते हुए भूख हड़ताल की थी, जिसके बाद उन्हें पुलिस द्वारा जबरन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अंततः चौतरफा दबाव के चलते तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका पर सुनवाई की है। कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और पैलेट गन से घायल हुए लोगों का इलाज कराने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान तैनात आरएएफ (रैपिड एक्शन फोर्स) की ओर से इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोलियों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। साथ ही, कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि पैलेट से घायल हुए पीड़ितों को पूरा मेडिकल इलाज दिया जाए। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि पैलेट गन के इस्तेमाल की एसओपी क्या है। कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस पर जवाब मांगा। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पैलेट गन पर बैन लगाने की मांग में संशोधन करने का निर्देश दिया। याचिका में पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच गुरुवार को रिटायर्ड इंटेलिजेंस ब्यूरो के स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आजाद और दो अन्य लोगों (प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान पैलेट से घायल हुए सभी पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने और साथ ही पीड़ितों का इलाज कराए जाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल अपने आप में अनुचित है, क्योंकि यह गैर संवैधानिक होने के साथ ही तर्क की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
रीवा। रीवा जिले के चाकघाट निवासी एवं बीजेपी किसान मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रशांत पाठक पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जानलेवा हमला होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना शनिवार की है जब प्रयागराज के व्यस्ततम सुभाष चौराहे पर जंतर-मंतर छात्र आंदोलन का समर्थन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया। गाड़ी पर भारतीय जनता पार्टी का झंडा लगा देखकर भीड़ उग्र हो गई और 'बीजेपी वाला है, इसे मारो' के नारे लगाते हुए वाहन पर टूट पड़ी। उपद्रवियों ने गाड़ी के कांच फोड़ दिए और पार्टी का झंडा उखाड़कर फेंक दिया। प्रशांत पाठक के अनुसार, उग्र भीड़ ने उनकी गाड़ी का दरवाजा तोड़कर उन्हें जबरन बाहर खींचने और गंभीर चोट पहुँचाने का प्रयास किया। लगभग एक घंटे तक चले भारी हंगामे और मशक्कत के बाद किसी तरह उनके ड्राइवर ने मौका पाकर गाड़ी को भीड़ के बीच से सुरक्षित बाहर निकाला। इस पूरी हिंसक घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें उपद्रवी गाड़ी में तोड़फोड़ करते नजर आ रहे हैं। घटना के संबंध में प्रशांत पाठक ने प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। अपना दर्द साझा करते हुए उन्होंने कहा, मैं अपने इलाज के सिलसिले में प्रयागराज गया था। वापस लौटते समय सुभाष चौराहे पर प्रदर्शन कर रहे युवकों ने हमारी गाड़ी रोक ली और तोड़फोड़ शुरू कर दी। वे हमारे साथ मारपीट पर आमादा थे। मैं मौत को छूकर वापस लौटा हूँ। उन्होंने इस हमले के पीछे सीधे तौर पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं का हाथ होने का गंभीर आरोप लगाया है। स्थानीय पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने प्रशांत पाठक द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। रीवा जिला कांग्रेस अध्यक्ष बिजेंद्र गुप्ता ने पलटवार करते हुए कहा, जब काम ही ऐसे किए हैं तो कोई हार कैसे पहनाएगा? कांग्रेस या समाजवादी पार्टी ने कोई हमला नहीं कराया है। यह बीजेपी की छात्र-विरोधी नीतियों से नाराज और निराश युवाओं का स्वाभाविक गुस्सा है, जिसके लिए खुद भारतीय जनता पार्टी जिम्मेदार है।