Monday, October 5, 2026

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विराट कोहली का महा-रिकॉर्ड: सचिन को पीछे छोड़ बने सबसे तेज 15 हजारी

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गायब दस्तावेजों और प्रशासनिक देरी को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

इंदौर जल संकट:गायब दस्तावेजों और प्रशासनिक देरी को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल संकट की न्यायिक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने और प्रशासनिक स्तर पर हुई लंबी देरी पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार को स्पष्ट रूप से जवाबदेही तय करनी चाहिए। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को इंदौर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि न्यायिक जांच रिपोर्ट ने केवल पानी के दूषित होने पर ही सवाल नहीं उठाए हैं, बल्कि यह भी सामने आया है कि शहर की जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्था की योजना कैसे बनाई गई, उसका रखरखाव कैसे हुआ और उसकी निगरानी किस तरह की गई। सिंघार ने कहा, “महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग रिकॉर्ड आयोग के सामने उपलब्ध नहीं कराए गए। सरकार को बताना चाहिए कि ये रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं थे और इस चूक के लिए किसकी जवाबदेही तय होगी।” मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय आयोग ने भागीरथपुरा में पानी के दूषित होने, लोगों के बीमार पड़ने और मौतों के कारणों के साथ प्रशासनिक एवं तकनीकी खामियों की जांच की थी। आयोग ने अगस्त में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी थी। कांग्रेस के मुताबिक, रिपोर्ट में पाया गया कि भागीरथपुरा में सीवरेज का पानी पेयजल पाइपलाइनों में प्रवेश कर गया था, जिससे लोगों तक पहुंचने वाला पानी दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त हो गया। रिपोर्ट में सीवरेज और गंदे पानी की पाइपलाइन से जुड़े कार्यों में हुई देरी की भी जांच की गई। इसमें टेंडर प्रक्रिया, फाइलों की आवाजाही और काम के क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं को देखा गया। सिंघार ने कहा कि लेआउट प्लान, ब्लूप्रिंट, डिजाइन ड्रॉइंग और पाइपलाइन अलाइनमेंट मैप जैसे तकनीकी दस्तावेज किसी भी शहरी जल नेटवर्क को समझने और उसके रखरखाव के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे दस्तावेजों का उपलब्ध नहीं होना गंभीर विषय है। कांग्रेस ने सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी एक फाइल में हुई देरी का मुद्दा भी उठाया। सिंघार ने दावा किया कि यह फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए 66 दिनों तक लंबित रही। उन्होंने पूछा कि फाइल के निस्तारण में इतनी देरी क्यों हुई। उन्होंने सवाल किया, “देश के सबसे स्वच्छ शहर में दूषित पेयजल के कारण मौतें कैसे हुईं?” हालांकि, मीडिया रिपोर्टों में उद्धृत जांच के निष्कर्षों के अनुसार, केवल इस आधार पर कि फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए लंबित रही थी, आयोग ने व्यक्तिगत रूप से मेयर की जिम्मेदारी तय नहीं की है। कांग्रेस की ओर से उठाया गया सवाल प्रशासनिक स्तर पर हुई देरी और उसकी जवाबदेही से संबंधित है। जांच आयोग ने कुल 36 मौतों की जांच की थी। सिंघार द्वारा उद्धृत रिपोर्ट के विवरण के अनुसार, इनमें 22 मौतों को दूषित पानी से संबंधित माना गया। हालांकि, इस घटना से जुड़ी मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। सिंघार ने प्रभावित परिवारों और मरीजों के लिए आयोग की सिफारिशों को लागू करने की भी मांग की। आयोग ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये और प्रभावित मरीजों के लिए आर्थिक एवं चिकित्सकीय सहायता की सिफारिश की है। सिंघार ने कहा, “भागीरथपुरा के लोगों को पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय मिलना चाहिए।” उन्होंने सरकार से पूछा कि आयोग की सिफारिशें कब लागू की जाएंगी और प्रभावित परिवारों को मुआवजा कब जारी किया जाएगा। भागीरथपुरा जल त्रासदी दिसंबर 2025 में सामने आई थी। उस समय दूषित पानी पीने के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग बीमार पड़ गए थे। न्यायिक आयोग ने पानी के नमूनों में ई. कोली और टोटल कोलीफॉर्म समेत बैक्टीरिया पाए जाने की बात कही थी। रिपोर्ट के अनुसार, दूषित पानी के कारण गैस्ट्रोएंटेराइटिस, उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी जलजनित बीमारियां हुईं। जांच में यह भी कहा गया कि क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों को समय पर बदल दिया जाता तो इस त्रासदी को रोका जा सकता था। ऐसे में प्रशासनिक देरी का मुद्दा जांच के प्रमुख पहलुओं में शामिल रहा।

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इंदौर के भागीरथपुरा कांड के जांच आयोग ने मानी पानी प्रदूषित होने की बात

उमंग सिंघार दूषित पानी को लेकर आक्रोश:इंदौर के भागीरथपुरा कांड के जांच आयोग ने मानी पानी प्रदूषित होने की बात

इंदौर। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौत को लेकर गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि इंदौर में प्रदूषित पानी से मौत हुई थी। इंदौर स्थित रेसीडेंसी में विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी और न्यायिक जांच रिपोर्ट को लेकर संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि यह घटना स्वच्छता के लिए देशभर में पहचान रखने वाले इंदौर शहर में नागरिकों के जीवन, सुरक्षित पेयजल, प्रशासनिक जवाबदेही और नगर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आगे कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग ने पेयजल प्रदूषण के कारणों, बीमारी एवं मौतों, प्रशासनिक और तकनीकी खामियों तथा जिम्मेदारी की जांच की। आयोग की रिपोर्ट में पेयजल के दूषित होने, प्रशासनिक देरी और महत्वपूर्ण तकनीकी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने कहा है कि इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहरों में अपनी पहचान रखता है, लेकिन भागीरथपुरा की घटना ने नागरिकों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की मूलभूत आवश्यकता भी शामिल है।इंदौर जैसे बड़े शहरी एवं आर्थिक केंद्र में, पर्याप्त प्रशासनिक संसाधनों के बावजूद ऐसी घटना होना गंभीर चिंता का विषय है। नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पेयजल प्रदूषण, मौतों एवं बीमारियों के कारणों, प्रशासनिक विफलताओं तथा जिम्मेदारी की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग गठित किया। आयोग ने अगस्त 2026 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और बाद में हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए। आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भागीरथपुरा में आपूर्ति किया जा रहा पेयजल दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाया गया। जांच में सीवेज के पेयजल पाइपलाइन में प्रवेश को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया गया।आयोग ने 36 मौतों का परीक्षण किया, जिनमें से 22 मौतों को दूषित पानी से संबंधित माना गया।रिपोर्ट में जल एवं सीवरेज व्यवस्था की योजना, रखरखाव, निगरानी और पर्यवेक्षण में व्यवस्थागत कमियों की ओर भी संकेत किया गया है।

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कांग्रेस ने लगाया लापरवाही का आरोप; बालाघाट पुलिस की चिट्ठी सामने आई, सहयोग न मिलने की कही बात

राहुल गांधी के दौरे से पहले सुरक्षा पर घमासान:कांग्रेस ने लगाया लापरवाही का आरोप; बालाघाट पुलिस की चिट्ठी सामने आई, सहयोग न मिलने की कही बात

बालाघाट। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के प्रस्तावित दौरे से कुछ घंटे पहले प्रदेश कांग्रेस ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। हालांकि, बालाघाट जिला पुलिस की 29 सितंबर को जारी एक चिट्ठी सामने आई है, जिसमें स्थानीय कांग्रेस विधायक संजय उइके को राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताओं से अवगत कराते हुए व्यवस्थाओं में सहयोग मांगा गया था। कांग्रेस ने पुलिस की यह चिट्ठी मीडिया के साथ साझा की और आरोप लगाया कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम की जानकारी होने के बावजूद सरकारी तंत्र अब राहुल गांधी के दौरे की जानकारी नहीं होने की बात कह रहा है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को एक बयान में राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर बालाघाट पुलिस और प्रशासन की कथित लापरवाही को “अत्यंत आपत्तिजनक” बताया। पटवारी ने कहा, “कार्यक्रम पहले से निर्धारित था और इसकी पूर्व सूचना भी दी गई थी। इसके बावजूद सरकारी तंत्र उनके दौरे की जानकारी नहीं होने की बात कह रहा है। यह अपने आप में व्यवस्था की खामियों और कमियों को उजागर करता है।” बालाघाट पुलिस की ओर से बैहर विधायक संजय उइके को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि पुलिस को विभिन्न माध्यमों से राहुल गांधी के 1 अक्टूबर को बालाघाट दौरे और सार्वजनिक कार्यक्रम की जानकारी मिली थी। हालांकि, पुलिस के अनुसार आयोजकों ने उनके आगमन और कार्यक्रम से संबंधित लिखित सूचना या विस्तृत जानकारी पहले उपलब्ध नहीं कराई थी। पुलिस ने चिट्ठी में सुरक्षा की दृष्टि से बालाघाट को “अत्यंत संवेदनशील और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्र” बताया। इसमें कहा गया कि ऐसे क्षेत्रों में वीआईपी/वीवीआईपी मूवमेंट के लिए एडवांस सिक्योरिटी लाइजनिंग, रूट क्लियरेंस, बम डिस्पोजल जांच, एंटी-नक्सल कॉम्बिंग ऑपरेशन और बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा जरूरी होता है। पुलिस ने यह भी कहा कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में कम समय में पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती, यातायात डायवर्जन और आपातकालीन व्यवस्थाएं करना प्रशासनिक और सुरक्षा की दृष्टि से “बेहद जटिल और कठिन” होता है। चिट्ठी में विधायक संजय उइके से प्रशासन के साथ तत्काल समन्वय करने को कहा गया। साथ ही कांग्रेस के आयोजकों और स्वयंसेवकों के साथ मिलकर कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया। इसमें कार्यक्रम का शेड्यूल, संभावित लोगों की संख्या, स्वयंसेवकों की सूची और मोबाइल नंबर, पार्किंग एवं यातायात व्यवस्था तथा राहुल गांधी से मिलने वाले लोगों की जानकारी मांगी गई थी। पुलिस ने चिट्ठी में यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी को जेड-प्लस सुरक्षा प्राप्त है। उनके साथ संभावित मुलाकात करने वाले लोगों के नाम, मोबाइल नंबर और आधार संबंधी विवरण भी मांगे गए थे। पुलिस के मुताबिक, उस समय तक यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। चिट्ठी में न्यायमूर्ति वर्मा आयोग और वीवीआईपी सुरक्षा संहिता का भी उल्लेख किया गया। पुलिस ने कहा कि किसी भी वीआईपी/वीवीआईपी कार्यक्रम की पूरी जानकारी, कार्यक्रम का समय और रूट मैप स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन को पर्याप्त समय पहले उपलब्ध कराना आयोजकों की जिम्मेदारी है। संजय उइके वर्ष 2013 से लगातार बैहर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की थी। राहुल गांधी का बालाघाट दौरा जिले में आदिवासी बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों से मुलाकात के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिले में संक्रामक बीमारियों, कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।

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बोले- आदिवासी महिलाओं को नहीं मिल रहा लाड़ली बहना का पैसा, कुपोषण और बीमारी से मौतों पर केंद्र व एमपी सरकार पूरी तरह फेल

आदिवासियों के आंसू पोंछने पहुंचे राहुल गांधी :बोले- आदिवासी महिलाओं को नहीं मिल रहा लाड़ली बहना का पैसा, कुपोषण और बीमारी से मौतों पर केंद्र व एमपी सरकार पूरी तरह फेल

बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बीमारी और भीषण कुपोषण के चलते जान गंवाने वाले आदिवासी बच्चों के पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आदिवासियों की दयनीय स्थिति, स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर दोनों सरकारों को पूरी तरह 'विफल' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुस्तान के दिल में रहने वाले आदिवासियों को लावारिस हाल में छोड़ दिया गया है, जहां न अस्पताल हैं, न स्कूल और न ही पीने का साफ पानी। पीड़ित परिवारों से सीधे संवाद के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मौतों के बावजूद प्रशासन और सरकार का रवैया असंवेदनशील बना हुआ है और आधे से ज्यादा पीड़ित परिवारों को अब तक उचित मुआवजा तक नहीं दिया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि सुदूर वनांचल में मलेरिया और कुपोषण से मासूम बच्चों की लगातार मौतें प्रशासनिक विफलता और स्वास्थ्य तंत्र के पतन का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। मौतों के बावजूद सरकार ने परिवारों को कोई ठोस सहायता नहीं दी। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है और इस त्रासदी के लिए सीधे तौर पर केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार जिम्मेदार हैं। योजनाओं में भेदभाव का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि आदिवासी अंचलों की महिलाओं को 'लाड़ली बहना योजना' की राशि तक नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रचार-प्रसार के बड़े-बड़े दावों के उलट जमीनी हकीकत यह है कि आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं और परिवारों को सरकारी योजनाओं से काट दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आदिवासियों की जमीन, वन अधिकार कानून (FRA) और पट्टों से जुड़े अधिकार आज भी अनसुलझे हैं। परियोजना या अन्य कारणों से विस्थापित हुए परिवारों को न मुआवजा मिला और न ही जमीन के पट्टे दिए गए। उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से भागे नहीं और तत्काल प्रभावित परिवारों को जमीन का मालिकाना हक (पट्टा) व पूरा मुआवजा जारी करे। भाजपा के संबोधन पर कड़ा ऐतराज जताते हुए राहुल ने स्पष्ट किया कि वे उन्हें 'वनवासी' नहीं बल्कि 'आदिवासी' मानते हैं, क्योंकि वे इस देश की जल, जंगल और जमीन के मूल मालिक हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनते ही आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा और स्वास्थ्य-शिक्षा के स्तर को सुधारना पहली प्राथमिकता होगी। राहुल गांधी ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की उपेक्षा और नाम बदलने की सियासत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि मनरेगा को आदिवासी क्षेत्रों में पूरी क्षमता के साथ दोबारा प्रभावी रूप से संचालित किया जाए ताकि भुखमरी और पलायन रुके। साथ ही उन्होंने सभी आदिवासी गांवों में तत्काल पक्के स्कूल, अस्पताल, बिजली और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग रखी। राहुल गांधी बालाघाट के सुदूर आदिवासी बाहुल्य जगला गांव पहुंचकर कुपोषण, मलेरिया, खसरा और दूषित पेयजल जैसी बीमारियों से जान गंवाने वाले बैगा बच्चों के शोकाकुल परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिले और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान स्थानीय प्रशासन द्वारा दर्ज आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर भी उजागर हुआ। जहां स्थानीय प्रशासन आधिकारिक तौर पर बीमारियों से सीमित मौतों की पुष्टि कर रहा है, वहीं कांग्रेस और स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि पिछले दो-तीन महीनों में 30 से अधिक बच्चों की जान गई है। राहुल गांधी विशेष रूप से उन पांच परिवारों से मिले, जिनके बच्चों की मौत का रिकॉर्ड प्रशासनिक दस्तावेजों में दर्ज नहीं किया गया था। मुख्य कार्यक्रम स्थल पर जाने से पहले उन्होंने माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल का औचक निरीक्षण भी किया, जहां उन्होंने स्कूली बच्चों से बातचीत कर मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता और दैनिक व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरे को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार के मंत्रियों ने राहुल गांधी के इस दौरे को संकट के समय में केवल "राजनीतिक माइलेज" हासिल करने की एक कवायद करार दिया है। इसके विपरीत, कांग्रेस का आरोप है कि राज्य के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं और उचित पोषण व समय पर इलाज न मिलने के कारण मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। मध्य प्रदेश के सियासी समीकरणों में आदिवासी (ST) मतदाता हमेशा से ही सत्ता की कुंजी माने जाते रहे हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की कुल आबादी का लगभग 21.1 प्रतिशत हिस्सा आदिवासी समुदाय का है। यही वजह है कि राज्य की 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित हैं, जबकि 37 अन्य सामान्य सीटों पर भी आदिवासी मतदाता हार-जीत तय करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, राज्य की 29 लोकसभा सीटों में से 6 सीटें ST वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इतिहास गवाह है कि वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 47 आरक्षित ST सीटों में से 30 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर राज्य में सरकार बनाई थी, जबकि 2023 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने वापसी करते हुए 24 आरक्षित सीटों पर कब्जा जमाया था। ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा केवल एक संवेदना व्यक्त करने की पहल न होकर आगामी राजनीतिक संदेश देने का भी प्रयास माना जा रहा है।

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मध्य प्रदेश में कुपोषण से मर रहे बच्चे और सड़ रहा अनाज

उमंग सिंघार ने लगाए आरोप :मध्य प्रदेश में कुपोषण से मर रहे बच्चे और सड़ रहा अनाज

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि एक तरफ अनाज सड़ रहा है तो दूसरी ओर कुपोषण से बच्चों की मौत हो रही है। नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य के लोगों को अनाज मिल नहीं पा रहा है और उसी का नतीजा है कि कुपोषण से बच्चों की मौत हो रही है, अनाज सड़ने की स्थिति में है। सवाल उठ रहा है कि क्या एथेनॉल प्लांट के लिए जानबूझकर अनाज को खराब किया जा रहा है। अगर बच्चों तक यह अनाज पहुंच जाता तो कुपोषण के शिकार बच्चे नहीं होते, बालाघाट का मामला हम सबके सामने हैं । कांग्रेस लगातार सरकार की नीतियों और युवाओं की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर मुखर है। इस सवाल को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस आम जनता की आवाज है और हर वर्ग के जो मुद्दे हैं उन मुद्दों को उठा रही है, हर वर्ग को उसके अधिकार दिलाना कांग्रेस की जिम्मेदारी है और जनता के बीच जाकर यह बताया जा रहा है कि सरकार की जो जिम्मेदारी है, उसका निर्वहन वह ठीक तरीके से नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आने वाले समय में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाती रहेगी जब तक उनका निराकरण नहीं हो जाता । इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को लेकर नेता प्रतिरोध ने कहा कि जिस दिन ई वी एम से चुनाव होना बंद हो जाएगा उसे दिन भारतीय जनता पार्टी सीमित हो जाएगी।

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