बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर/बिरसा क्षेत्र स्थित जगला गांव में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का यह दौरा राज्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट और राजनीतिक खींचतान दोनों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राहुल गांधी विशेष रूप से उन बैगा आदिवासी परिवारों से मुलाकात करने पहुंचे हैं, जिन्होंने हाल ही में बीमारियों के कारण अपने मासूम बच्चों को खो दिया है।
पीड़ित परिवारों से संवाद और जमीनी हकीकत का जायजा
राहुल गांधी बालाघाट के सुदूर आदिवासी बाहुल्य जगला गांव पहुंचकर कुपोषण, मलेरिया, खसरा और दूषित पेयजल जैसी बीमारियों से जान गंवाने वाले बैगा बच्चों के शोकाकुल परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिले और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान स्थानीय प्रशासन द्वारा दर्ज आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर भी उजागर हुआ। जहां स्थानीय प्रशासन आधिकारिक तौर पर बीमारियों से सीमित मौतों की पुष्टि कर रहा है, वहीं कांग्रेस और स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि पिछले दो-तीन महीनों में 30 से अधिक बच्चों की जान गई है। राहुल गांधी विशेष रूप से उन पांच परिवारों से मिले, जिनके बच्चों की मौत का रिकॉर्ड प्रशासनिक दस्तावेजों में दर्ज नहीं किया गया था। मुख्य कार्यक्रम स्थल पर जाने से पहले उन्होंने माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल का औचक निरीक्षण भी किया, जहां उन्होंने स्कूली बच्चों से बातचीत कर मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता और दैनिक व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली।
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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तीखी प्रतिक्रियाएं
इस दौरे को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार के मंत्रियों ने राहुल गांधी के इस दौरे को संकट के समय में केवल "राजनीतिक माइलेज" हासिल करने की एक कवायद करार दिया है। इसके विपरीत, कांग्रेस का आरोप है कि राज्य के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं और उचित पोषण व समय पर इलाज न मिलने के कारण मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक के मायने
मध्य प्रदेश के सियासी समीकरणों में आदिवासी (ST) मतदाता हमेशा से ही सत्ता की कुंजी माने जाते रहे हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की कुल आबादी का लगभग 21.1 प्रतिशत हिस्सा आदिवासी समुदाय का है। यही वजह है कि राज्य की 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित हैं, जबकि 37 अन्य सामान्य सीटों पर भी आदिवासी मतदाता हार-जीत तय करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, राज्य की 29 लोकसभा सीटों में से 6 सीटें ST वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
इतिहास गवाह है कि वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 47 आरक्षित ST सीटों में से 30 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर राज्य में सरकार बनाई थी, जबकि 2023 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने वापसी करते हुए 24 आरक्षित सीटों पर कब्जा जमाया था। ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा केवल एक संवेदना व्यक्त करने की पहल न होकर आगामी राजनीतिक संदेश देने का भी प्रयास माना जा रहा है।











