अगरतला। त्रिपुरा में गुरुवार को स्तन स्वास्थ्य, शीघ्र निदान, जोखिम कारकों के बारे में जागरूकता और निरंतर देखभाल को बढ़ावा देने के लिए 'स्तन कैंसर जागरूकता' अभियान की शुरुआत की गई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान राज्यभर में एक महीने तक चलेगा।
स्वास्थ्य सचिव गित्ते किरणकुमार दिनकरराव ने अगरतला में वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों की उपस्थिति में 'स्तन कैंसर जागरूकता' माह के लिए राज्यव्यापी अभियान का शुभारंभ किया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्तन कैंसर विश्व स्तर पर महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है और यह एक गंभीर जन स्वास्थ्य चिंता का विषय बना हुआ है।
ग्लोबोकैन 2022 के अनुसार, वर्ष 2022 में वैश्विक स्तर पर लगभग 23 लाख महिलाओं में स्तन कैंसर का पता चला, जबकि लगभग 6.7 लाख महिलाओं की इस बीमारी से मृत्यु हो गई। भारत में, वर्ष 2024 में स्तन कैंसर के लगभग 2,37,231 नए मामले और 96,100 मौतें दर्ज की गईं, जिसमें भारतीय महिलाओं में सभी कैंसरों में स्तन कैंसर का हिस्सा 30.4 प्रतिशत है।
अधिकारी ने बताया कि आईसीएमआर की त्रिपुरा जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री (पीबीसीआर) के अनुसार, 2012-2016 के दौरान राज्य में महिलाओं में होने वाले कैंसर के सभी मामलों में से 14.4 प्रतिशत मामले स्तन कैंसर के थे, जिससे लगभग हर 123 में से एक महिला प्रभावित हुई।
बता दें कि त्रिपुरा सरकार ने कैंसर की जांच को बेहतर बनाने और पात्र आबादी तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने पिछले साल 31 दिसंबर को 'मुख्यमंत्री निरामय आरोग्य अभियान' (एमएनएए) की शुरुआत की। इस पहल के तहत, राज्य भर के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में साल में दो बार (1 से 14 जनवरी और 14 से 31 जुलाई तक) कैंसर और अन्य गैर-संचारी रोगों पर ध्यान केंद्रित करते हुए विशेष जांच की जाती है।
गुरुवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आम जनता के लिए जानकारीपूर्ण सामग्री और हितधारकों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और छात्रों के लिए तकनीकी सामग्री भी जारी की गई। त्रिपुरा में स्तन कैंसर के बारे में जागरूकता और देखभाल को बेहतर बनाने के मकसद से शुरू की गई पहल के लिए 'झपिएगो' ने तकनीकी सहायता प्रदान की।
अधिकारी के अनुसार, महीनेभर चलने वाले इस अभियान में एम्स और 'झपिएगो' के साथ मिलकर अलग-अलग स्तरों पर कार्यशालाएं, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और आशा कार्यकर्ताओं के साथ परामर्श, चिकित्सा और पैरामेडिकल संस्थानों में सेमिनार, विभिन्न मीडिया चैनलों के माध्यम से टॉक शो, सोशल मीडिया अभियान, पीआरआई सदस्यों के साथ व्यक्तिगत संवाद और 'ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस' के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) और सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) की ओर से सामुदायिक स्तर की गतिविधियां शामिल होंगी।
राज्य के गैर-संचारी रोग कार्यक्रम अधिकारी अर्जुन साहा ने स्तन कैंसर जागरूकता के महत्व और अभियान की कार्ययोजना पर एक प्रस्तुति दी। स्वास्थ्य सचिव ने सभी हितधारकों और समाज के सदस्यों से जागरूकता अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया और राज्य में स्तन कैंसर की शीघ्र पहचान को बढ़ावा देने और रोकथाम एवं देखभाल को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयासों के महत्व पर बल दिया।
इस कार्यक्रम में एनएचएम के अतिरिक्त सचिव-सह-मिशन निदेशक साजू वहीद, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक, परिवार कल्याण निदेशक, एनएचएम के संयुक्त मिशन निदेशक, एनएचएम की राज्य स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सोसायटी के सदस्य सचिव और सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद थे।














