छतरपुर, संजय अवस्थी। बेहतर भविष्य और परिवार की माली हालत सुधारने का सपना लेकर सात समंदर पार दुबई कमाने गए छतरपुर जिले के एक नौजवान की जिंदगी साथियों के धोखे और साजिश के चलते जेल की सलाखों के पीछे फंस गई है। सटई/सरानी गांव निवासी बलवान कुशवाहा का 23 वर्षीय इकलौता बेटा अमर कुशवाहा पिछले कई महीनों से दुबई की कुख्यात अल-वरसा जेल में बंद है।
अपनों के छलावे का शिकार हुए अमर के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर साथियों ने फर्जी सिम कार्ड और अवैध बैंक खाते संचालित किए, जिसका खामियाजा अब यह बेकसूर युवक भुगत रहा है। वतन वापसी और डिपोर्ट कराने के नाम पर भी ठगों ने पिता से 90 हजार रुपए ऐंठ लिए और उसे छुड़ाने के बजाय जेल की कोठरी में डलवा दिया। अब बेबस पिता छतरपुर से लेकर दिल्ली तक बेटे की रिहाई के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
पेंटिंग के काम के लिए एजेंट पप्पू सिंह ने भेजा था दुबई
पीड़ित पिता बलवान कुशवाहा ने अपनी दास्तान बयां करते हुए बताया कि उनका बेटा अमर 13 मई 2025 को घर से निकला था। वह दिल्ली और मुंबई होते हुए 16 मई 2025 को दुबई पहुंचा। अमर के साथ गांव व आसपास के दो अन्य साथी—रियाज खान और नरेश अहिरवार भी गए थे। तीनों को पप्पू सिंह नामक एक एजेंट ने विदेश भेजा था। योजना के अनुसार, नरेश को मिस्त्री के काम पर और अमर व रियाज को पेंटर के काम पर लगना था। दुबई एयरपोर्ट पहुंचने पर 'बीसीसी' (BCC) कंपनी के प्रतिनिधियों ने उन्हें रिसीव किया और काम पर लगाया। करीब 6-7 महीने तक सब कुछ सामान्य चलता रहा।
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रियाज और अंसारी की साजिश: अमर की आईडी पर फर्जी सिम व खातों का खेल
परिजनों के अनुसार, कुछ महीने बाद रियाज खान किसी अंसारी नाम के व्यक्ति के संपर्क में आया और उसने अमर को भी बहला-फुसलाकर अपने पास बुला लिया। वहां रियाज और अंसारी ने एक सोची-समझी साजिश के तहत अमर के मूल दस्तावेजों (पहचान पत्र व पासपोर्ट संबंधी कागजात) का इस्तेमाल कर अपने नाम से नहीं, बल्कि अमर के नाम पर कई फर्जी मोबाइल सिम कार्ड और बैंक खाते खुलवा लिए। जब दुबई पुलिस ने अवैध साइबर गतिविधियों, फर्जी सिम और खातों की धोखाधड़ी के नेटवर्क पर शिकंजा कसा, तो कागजों में नाम होने के कारण पुलिस ने अमर कुशवाहा को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि दो-तीन दिन की प्रारंभिक पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया, लेकिन उसके तमाम दस्तावेज जब्त हो चुके थे और वह वहां अवैध रूप से फंस गया।
डिपोर्ट कराने के नाम पर ठगे 90 हजार, डिपोर्ट सेंटर के बजाय सीधे जेल भिजवाया
एफआईआर और कानूनी पचड़ों में फंसने के बाद अमर पिछले 5-6 महीनों से दुबई में एक किराए के कमरे में छिपकर दिन काट रहा था। भारत से पिता पाई-पाई जोड़कर पैसे भेजते थे, जिससे बेटे का दाना-पानी चल रहा था।
इसी बीच सितंबर महीने में दुबई के ही दो-तीन दलालों ने अमर से संपर्क किया और दावा किया कि वे 90 हजार रुपए के खर्च में उसे डिपोर्ट सेंटर के जरिए 15 दिनों के भीतर सुरक्षित भारत पहुंचा देंगे। लाचार पिता बलवान कुशवाहा ने कर्ज लेकर 90 हजार रुपए दुबई भिजवाए। लेकिन ठगों ने अमर को भारत भेजने या कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने के बजाय उसे सीधे दुबई की अल-वरसा जेल भिजवा दिया, जहां वह आज भी बंद है।
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जेल से कभी-कभार आता है फोन, रोते हुए अमर ने कहा—'मैं बेकसूर हूं'
परिजनों ने बताया कि जेल से हर एक-दो हफ्ते में अमर का संक्षिप्त फोन कॉल घर पर आता है। हाल ही में जब उसका फोन आया, तो उसने बिलखते हुए बताया कि उसके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है। उसने जेल प्रशासन और जांच एजेंसियों से भी निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है कि धोखाधड़ी में उसका कोई हाथ नहीं है और मुख्य साजिशकर्ता रियाज व अंसारी हैं।
पीएमओ, विदेश मंत्रालय और एसपी से पिता की गुहार: 'मेरा बेटा लौटा दो'
इकलौते बेटे के विदेशी जेल में बंद होने के बाद से मां किरन कुशवाहा का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता बलवान कुशवाहा न्याय की आस में भटक रहे हैं। उन्होंने छतरपुर एसपी, स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों को लिखित शिकायत सौंपकर मदद मांगी है। नई दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और विदेश मंत्रालय में औपचारिक आवेदन दाखिल कर भारत सरकार से कूटनीतिक दखल की अपील की है। मंत्रालय से परिवार को आश्वासन मिला है, लेकिन कागजी कार्रवाई में हो रही देरी से बुजुर्ग माता-पिता की सांसें अटकी हुई हैं। पीड़ित परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हाथ जोड़कर गुहार लगाई है कि एक निर्दोष भारतीय युवा को विदेशी जेल की यातनाओं से मुक्त कराकर सकुशल अपने वतन वापस लाया जाए।











