भोपाल। भोपाल विकास योजना (मास्टर प्लान)-2047 के प्रकाशित प्रारूप को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 18 के तहत संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश के समक्ष अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मास्टर प्लान का यह ड्राफ्ट कानूनी खामियों से भरा है और इसमें आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों के बजाय शहर के बेलगाम विस्तार पर अधिक ध्यान दिया गया है।
"21 सालों से मास्टर प्लान के इंतजार में भोपाल"
पत्रकारों और अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखते हुए अभय दुबे ने कहा कि भोपाल का पिछला मास्टर प्लान 2005 में समाप्त हो चुका है और शहर पिछले 21 सालों से एक वैध व प्रभावी विकास योजना का इंतजार कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि 15 महीने के कांग्रेस शासनकाल में 'भोपाल विकास योजना 2031' का प्रारूप पूरी पारदर्शिता के साथ प्रकाशित किया गया था, जिसमें 3 हजार से अधिक आपत्तियों की सुनवाई पूरी हो चुकी थी। केवल अंतिम अधिसूचना जारी होना बाकी था, लेकिन मौजूदा सरकार ने उस प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि धारा 15 के तहत 2024 के वर्तमान भूमि उपयोग मानचित्र का विधिवत प्रकाशन, आपत्तियां आमंत्रित करने और अंगीकरण (Adoption) की अनिवार्य प्रक्रिया पूरी किए बिना ही यह नया प्रारूप जारी कर दिया गया है।
मास्टर प्लान 2047 पर कांग्रेस की मुख्य आपत्तियां
कांग्रेस प्रवक्ता ने ड्राफ्ट में शामिल विभिन्न तकनीकी, पर्यावरणीय और वित्तीय कमियों को रेखांकित किया:
1. सार्वजनिक परिवहन और TOD पर सवाल
2047 तक भोपाल की संभावित 45 लाख आबादी के लिए सार्वजनिक परिवहन का कोई स्पष्ट लक्ष्य तय नहीं किया गया है। शहर में 54% यात्राएं पैदल, साइकिल या ऑटो से होती हैं, लेकिन बस नेटवर्क व साइकिल ट्रैक के लिए ठोस योजना गायब है। मेट्रो के दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में लगभग 9,500 हेक्टेयर क्षेत्र को TOD के तहत रखा गया है, लेकिन FAR, एफोर्डेबल हाउसिंग और पार्किंग जैसे अहम नियमों को बाद के फैसलों पर टाल दिया गया है।
2. बायपास के किनारे सघन विकास (High Density) का विरोध
51 किलोमीटर लंबे बायपास के दोनों ओर 300-300 मीटर के दायरे में (करीब 2,449 हेक्टेयर) सघन मिश्रित विकास के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि वहां मास ट्रांजिट या बस लेन की व्यवस्था नहीं है। इससे बाहरी यातायात को शहर से बाहर रखने का बायपास का मूल उद्देश्य खत्म हो जाएगा और निजी वाहनों पर निर्भरता बढ़ेगी।
3. जल निकायों का संरक्षण और पानी की किल्लत
भोपाल में मौजूद 18 प्रमुख जल निकायों में से केवल बड़े तालाब के जलग्रहण (Catchment) क्षेत्र के संरक्षण की योजना बनाई गई है, जो अपर्याप्त है। 2047 के विजन में पानी की जरूरत का आकलन केवल 2031 तक ही किया गया है। 45 लाख आबादी के लिए अनुमानित 209 MLD पानी की किल्लत को पूरा करने का कोई स्पष्ट स्रोत नहीं दर्शाया गया है।
4. सस्ते आवास और 59 हजार करोड़ का वित्तीय ढांचा गायब
भोपाल में करीब 4.8 लाख झुग्गीवासी हैं, लेकिन EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) और LIG के लिए पर्याप्त जमीन आरक्षित नहीं की गई है। मास्टर प्लान के तहत शहर के इस विस्तार पर लगभग ₹59,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान है, लेकिन इतने भारी बजट की व्यवस्था कहां से होगी, इसका कोई वित्तीय रोडमैप ड्राफ्ट में नहीं दिया गया है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
अभय दुबे ने मांग की है कि वर्तमान प्रारूप को वापस लेकर इसमें सुधार किया जाए:
- अद्यतन (Updated) लैंड यूज मैप को विधिवत अंगीकृत कर संशोधित ड्राफ्ट दोबारा प्रकाशित किया जाए।
- 2005 के ग्रीन बेल्ट में हुए बदलावों का तुलनात्मक ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।
- सार्वजनिक परिवहन, बायपास पर मास ट्रांजिट लेन, सस्ते आवास और वर्ष 2047 तक जल आपूर्ति की स्पष्ट योजना शामिल की जाए।
कांग्रेस का कहना है कि इन मूलभूत संशोधनों के बाद ही भोपाल को एक विधिक रूप से मजबूत और जनहितकारी मास्टर प्लान मिल सकेगा।














