पटना। भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नाम लिए जाने को लेकर राज्य एसटीएफ के महानिदेशक कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस पर राजद सांसद सुधाकर सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने नोटिस भेजने के अधिकार, उस पर हस्ताक्षर नहीं होने और निजी वकील के माध्यम से नोटिस भेजे जाने पर आपत्ति जताई है। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री से इस मामले में जवाब मांगा है। यदि उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
सुधाकर सिंह ने कहा कि संविधान और सेवा नियमों के तहत कुंदन कृष्णन को उन्हें नोटिस भेजने का अधिकार है या नहीं, यह स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी पूछा है कि क्या उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुमति दी गई है। जब बिहार सरकार के पास एडवोकेट जनरल हैं, तो उन्हें किसी निजी वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस क्यों भेजा गया? उन्होंने नोटिस पर कुंदन कृष्णन के हस्ताक्षर नहीं होने पर भी सवाल उठाए।
राजद सांसद ने इस मामले को प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों के बीच अधिकारों के पदानुक्रम से जोड़ते हुए संवैधानिक संकट करार दिया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक व्याख्या करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास है और इस मामले में भी शीर्ष अदालत से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
सुधाकर सिंह ने सवाल उठाया कि क्या कोई कनिष्ठ अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारी को नोटिस जारी कर सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और कार्यपालिका की व्यवस्था अधिकारों के एक निश्चित पदानुक्रम यानी 'चेन ऑफ कमांड' के तहत काम करती है। यदि इस व्यवस्था का पालन नहीं किया जाता है, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। जब अधिकारियों के पदों का क्रम निर्धारित है, तो 28वें स्थान पर मौजूद कोई व्यक्ति सातवें स्थान पर बैठे वरिष्ठ अधिकारी को नोटिस कैसे जारी कर सकता है? उन्होंने कहा कि इस मामले में वे सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण देने का आग्रह करेंगे।
सुधाकर सिंह ने बिहार के अधिकारियों के कामकाज पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अधिकारी किसी की बात नहीं सुनते, चाहे वह मुख्यमंत्री हों या सांसद और विधायक। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अधिकारियों का यही रवैया रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब वे जनप्रतिनिधियों की बातों को भी पूरी तरह नजरअंदाज करने लगेंगे।
राजद सांसद ने कुंदन कृष्णन की संपत्ति को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संपत्ति का विवरण देखने पर उन्हें पता चला कि कुंदन कृष्णन ने कैमूर में 16 एकड़ और 88 डिसमिल जमीन खरीदी है, जिसका अब तक खुलासा नहीं किया गया है। उन्होंने उनकी संपत्तियों की कीमत करोड़ों रुपए बताई।
सुधाकर सिंह ने कहा कि उनके पास अवैध संपत्ति का अलग से हिसाब है, जिसे वे बाद में सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी अधिकारी को अपनी पूरी सेवा के दौरान वेतन के रूप में चार से पांच करोड़ रुपए मिले हों और उसका खर्च दो से तीन करोड़ रुपए रहा हो, तो वह शेष दो से ढाई करोड़ रुपए से सैकड़ों करोड़ रुपए की संपत्ति कैसे बना सकता है?
इंडिया गठबंधन की एक नवंबर को प्रस्तावित रैली पर भी सुधाकर सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस रैली से व्यापारियों को कोई नुकसान नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि दीपावली एक नवंबर के बाद होने के कारण दिल्ली में इसके बाद भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि रैली को लेकर जो विरोध और शोर सुनाई दे रहा है, उसके पीछे व्यापारी नहीं, बल्कि भाजपा के लोग हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के मुद्दे पर सुधाकर सिंह ने कहा कि उन्हें एक न एक दिन इस्तीफा देना ही पड़ेगा, चाहे वे स्वयं इस्तीफा दें, संसद के माध्यम से उन्हें पद छोड़ना पड़े या जनता के दबाव में ऐसा करना पड़े।

















