यह है उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे के इस्तीफे की वजह, बोले- पार्टी में...?

Advertisement
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार शाम से जारी 'इस्तीफा कांड' पर अब आधिकारिक मुहर लग गई है। शाम करीब 7 बजे मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) ने स्पष्ट कर दिया कि अटेर विधायक हेमंत कटारे ने 'उप नेता प्रतिपक्ष' के पद से अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब विधानसभा का बजट सत्र जारी है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
मैरिज एनिवर्सरी पर 'त्यागपत्र' का धमाका
दिलचस्प बात यह है कि शुक्रवार को ही हेमंत कटारे की शादी की सालगिरह थी। वे दोपहर 4 बजे तक सदन की कार्यवाही में पूरी तरह सक्रिय थे, लेकिन अचानक बाहर निकले और फिर उनका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। सस्पेंस के करीब 3 घंटे बाद कांग्रेस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस्तीफे की पुष्टि की। कटारे ने अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को भेजा है।
इस्तीफे की वजह: 'परिवार और क्षेत्र को वक्त नहीं दे पा रहा'
हेमंत कटारे ने अपने पत्र में किसी राजनीतिक मनमुटाव के बजाय व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने लिखा, "पारिवारिक दायित्वों और समय की कमी के कारण मैं अपनी विधानसभा (अटेर) की जनता को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहा हूं, इसलिए इस जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहता हूं।" संगठन महासचिव डॉ. संजय कामले ने स्पष्ट किया कि कटारे ने केवल पद छोड़ा है, पार्टी नहीं। वे पूरी निष्ठा के साथ कांग्रेस में बने रहेंगे।
बीजेपी विधायक से वो मुलाकात और सिंघार की हैरानी
सदन से निकलते वक्त कटारे का बीजेपी विधायक भगवानदास सबनानी से कहना कि "भाईसाहब, मुझे भी साथ ले चलिए", अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि सबनानी ने इसे मजाक बताया है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस घटनाक्रम पर हैरानी जताते हुए कहा, "यह हमारे लिए आश्चर्य की बात है। वे दिन में हमारे साथ थे और काफी खुश थे। यह परिवार की बात है, बैठकर समझेंगे कि आखिर कारण क्या रहा।"
अब आगे क्या?
फिलहाल, हेमंत कटारे का इस्तीफा स्वीकार करना है या नहीं, इसका अंतिम फैसला जीतू पटवारी और हाईकमान पर छोड़ दिया गया है। कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय का मानना है कि मामला 'घर' का है और जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। लेकिन बजट सत्र के बीच पार्टी के एक महत्वपूर्ण पदाधिकारी का इस तरह अचानक पद छोड़ना और गायब हो जाना, कांग्रेस की आंतरिक रणनीति पर सवाल जरूर खड़े कर रहा है।


