उचेहरा राशन घोटाला: गरीबों की थाली पर डाका, भ्रष्टाचार का सबसे घिनौना चेहरा

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सतना,अंबिका केशरी। उचेहरा विकासखंड की राशन दुकानों में सामने आए करीब तीन करोड़ रुपये के खाद्यान्न घोटाले में आखिरकार पुलिस कार्रवाई शुरू हो गई है। पुलिस ने 12 उचित मूल्य दुकानों के प्रबंधक, विक्रेता और सहायक विक्रेताओं के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 और 7 के तहत मामला दर्ज किया है। उचेहरा थाना में सभी आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग 12 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। वहीं सोमवार को ग्रामीणों ने कलेक्टर से मुलाकात कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
बताया जा रहा है कि सीएम हेल्पलाइन में मिली शिकायतों के आधार पर उचेहरा एसडीएम द्वारा जांच कराई गई थी। जांच में विकासखंड की 26 उचित मूल्य दुकानों में भारी अनियमितताएं सामने आईं। जांच दल को दुकानों के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर मिला।
जांच में करीब 3 करोड़ 1 लाख 68 हजार 884 रुपये का खाद्यान्न गायब पाया गया। इसमें 4897 क्विंटल गेहूं, 4132 क्विंटल चावल, 44 क्विंटल नमक और 28 क्विंटल शक्कर स्टॉक में नहीं मिले। यह खाद्यान्न सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब परिवारों को वितरित किया जाना था।
आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद 22 फरवरी को एसडीएम ने 26 दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दुकानों को निलंबित कर दिया था और वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। इसके बाद अब पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।
जांच में उचेहरा ब्लॉक की कई दुकानों में लाखों रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। इनमें पोड़ी में 27.51 लाख, तुषगंवा में 21.38 लाख, आलमपुर में 21.12 लाख, परसमनिया में 20.95 लाख, पटिहट में 20.75 लाख, पिपरिया में 19.99 लाख और गढ़ौत में 19.84 लाख रुपये के खाद्यान्न की अनियमितता प्रमुख रूप से सामने आई है। इसके अलावा कई अन्य गांवों की दुकानों में भी लाखों रुपये के राशन का हिसाब नहीं मिला।
तीन महीने तक राशन न मिलने से नाराज ग्रामीणों ने धनेह गांव में होली के दौरान जल सत्याग्रह भी किया था। आंदोलन की सूचना मिलने पर जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह, एसडीएम सुमेश द्विवेदी और महिला बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी रविकांत शर्मा सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण दोषी कोटेदारों पर कार्रवाई और राशन वितरण की मांग पर अड़े रहे।
आंदोलन के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद अब आगे की जांच और कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

