छतरपुर (संजय अवस्थी/शिवम सोनी/विनोद मिश्रा/संदीप यादव)। आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के नेता दामोदर यादव रविवार को छतरपुर दौरे पर रहे। यहां दामोदर यादव ने न केवल अपनी 'संकल्प यात्रा' को नई धार दी, बल्कि कई मुद्दों पर प्रशासनिक बंदिशों होने के कारण लोगों के नाम लिए बगैर तीखे बयान देकर जिले की सियासत में हलचल पैदा कर दी। दोपहर करीब 2 बजे जब उनका काफिला मेला ग्राउंड स्थित अटल सभागार पहुंचा, तो समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी के साथ उनका स्वागत किया।
आजाद समाज पार्टी की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य दामोदर यादव ने मंच से बहुजन समाज के हक की आवाज बुलंद की। उन्होंने उच्च शिक्षा में समानता लाने के लिए यूजीसी (UGC) नियमों को तत्काल लागू करने की पुरजोर मांग की। आरक्षण के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने 13 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था में बदलाव कर उसे हटाने की बात कही, ताकि पिछड़े वर्गों को वास्तविक न्याय मिल सके। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि भीम आर्मी के विचारों को घर-घर तक पहुंचाएं और संकल्प यात्रा को और अधिक मजबूत बनाएं।

ग्वालियर हाईकोर्ट में बाबासाहेब की प्रतिमा का मुद्दा उठाया
दामोदर यादव ने एक महत्वपूर्ण ऐलान करते हुए मांग रखी कि आगामी 14 मार्च 2026 को ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए। उन्होंने इसे दलित-बहुजन समाज के आत्मसम्मान और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा से जोड़ते हुए कहा कि प्रतीकों का सम्मान समाज की चेतना के लिए अनिवार्य है।
सभा का सबसे विवादित और चर्चित हिस्सा वह रहा, जब दामोदर यादव ने संत-महात्माओं पर निशाना साधा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए तीखी टिप्पणी की, जिसे सीधे तौर पर धर्माचार्यों से जोड़कर देखा जा रहा है। उनके इस तंज ने अटल सभागार में मौजूद लोगों को चौंका दिया और कार्यक्रम के तुरंत बाद स्थानीय स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में पक्ष-विपक्ष की प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं।
प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा के बीच हुई सभा
दामोदर यादव की इस सभा को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस पहले से ही अलर्ट मोड पर थी। एएसपी आदित्य पटले के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति या गुटों के बीच टकराव को टाला जा सके। यादव की इस यात्रा ने छतरपुर में आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के कैडर में नई जान फूंक दी है, वहीं उनके बयानों ने आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक टकराव के संकेत दे दिए हैं।
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