छिंदवाड़ा ,जीशान अंसारी ।कहते हैं जब उम्मीद की आखिरी किरण भी बुझने लगती है, तब ईश्वर किसी न किसी रूप में मदद के लिए अपने बंदे को भेज देता है। ऐसा ही दृश्य छिंदवाड़ा के मुखेड़ क्षेत्र में देखने को मिला, जहाँ एक डॉक्टर मासूम बच्ची के लिए देवदूत बनकर सामने आए और उसे मौत के मुंह से खींच लाए।


जानकारी के अनुसार, गंभीर हालत में एक मासूम बच्ची को उसके परिजन घबराए हुए जन्नत क्लीनिक लेकर पहुँचे। बच्ची का ऑक्सीजन लेवल महज 65 प्रतिशत था, सांसें धीमी पड़ चुकी थीं और हालात बेहद नाज़ुक थे। परिजनों की आँखों में बेबसी साफ झलक रही थी।


क्लीनिक में मौजूद डॉ. सोहेल खान उस समय रोज़े में थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने बच्ची की हालत देखी, इंसानियत को सबसे ऊपर रखते हुए बिना किसी देरी के इलाज शुरू किया। रोज़े की परवाह किए बिना उन्होंने तुरंत CPR देना शुरू कर दिया। कुछ पल तक जिंदगी और मौत के बीच जंग चलती रही।


डॉक्टर के अथक प्रयासों और परिजनों की दुआओं के बीच कुछ ही क्षणों बाद बच्ची के रोने की आवाज गूँजी। यह सिर्फ रोना नहीं था, बल्कि जिंदगी की वापसी का संदेश था। बच्ची के सुरक्षित होते ही क्लीनिक में मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम हो गईं।


मासूम के परिजनों ने हाथ जोड़कर डॉक्टर का आभार जताया और लंबी उम्र की दुआएँ दीं। यह घटना सिर्फ एक सफल इलाज नहीं, बल्कि मानवता, त्याग और सेवा की जीती-जागती मिसाल बन गई। डॉ. सोहेल खान ने साबित कर दिया कि सच्चा चिकित्सक वही होता है, जो हर परिस्थिति में इंसानियत को ही अपना धर्म मानता है।