सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा सिविल अस्पताल से जुड़े एक संवेदनशील मामले में स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। यहां एक डेढ़ साल के बच्चे की इलाज के बाद आंखों की रोशनी जाने का मामला सामने आया था, जिस पर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गलत ड्रॉप देने का आरोप लगाया था। हालांकि, तीन सदस्यीय जांच टीम ने इस आरोप को सिरे से नकार दिया है। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बच्चा गंभीर रूप से कुपोषित था और शरीर में विटामिन-ए की भारी कमी के कारण उसकी आंखों में कॉर्नियल अल्सर (घाव) बन गए थे, जो रोशनी जाने की मुख्य वजह बने।


पिता ने लगाया था गलत दवा देने का आरोप

भूसा कमलपुर के निवासी इंद्राज विश्वकर्मा 29 मई को अपने डेढ़ साल के बेटे विनय को सर्दी और आंखों में लालिमा की शिकायत के बाद बंडा सिविल अस्पताल लाए थे। परिजनों का आरोप था कि ओपीडी डॉक्टर की पर्ची दिखाने पर दवा काउंटर से आई ड्रॉप की जगह नोजल ड्रॉप (नाक में डालने वाली दवा) दे दिया गया। परिजनों के अनुसार, इसे आंखों में डालने के बाद बच्चे को तेज जलन हुई और उसकी आंखों की रोशनी चली गई। बंडा से बच्चे को सागर और फिर वहां से बेहतर इलाज के लिए भोपाल एम्स (AIIMS) रेफर किया गया था। परिजनों का दावा था कि एम्स के डॉक्टरों ने भी इलाज में लापरवाही के कारण संक्रमण होने की बात कही थी।


तीन सदस्यीय टीम की जांच में क्या निकला?

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय टीम का गठन किया था। इस टीम में सागर की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अदिति दुबे, नेत्र सहायक डॉ. अशोक कुमार और बंडा सिविल अस्पताल के बीईई बालाराम अहिरवार शामिल थे। दो दिन की विस्तृत जांच के बाद टीम ने रिपोर्ट में निम्नलिखित बिंदु स्पष्ट किए:


  • सलाइन ड्रॉप से नुकसान नहीं: नोजल ड्रॉप (नॉर्मल सलाइन) डालने से आंखों की रोशनी कभी नहीं जा सकती। इससे सिर्फ कुछ समय के लिए हल्की जलन हो सकती है।
  • स्टॉक में नहीं था वह बैच: जिस नोजल ड्रॉप को डालने की बात कही जा रही है, उस बैच का ड्रॉप अस्पताल के आधिकारिक स्टॉक में उपलब्ध ही नहीं था।
  • असली कारण: बच्चे की आंखों की रोशनी जाने की वास्तविक वजह कुपोषण और विटामिन-ए की कमी से उत्पन्न हुआ कॉर्नियल अल्सर है।


एम्स में होगा कॉर्निया ट्रांसप्लांट, जांच अभी भी जारी

प्रभारी सीएमएचओ डॉ. देवेश पटेरिया ने जानकारी दी कि पीड़ित बच्चे का इलाज इस समय भोपाल एम्स में चल रहा है, जहां डॉक्टरों द्वारा उसका कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया जाएगा। शासन द्वारा बच्चे के इलाज में हरसंभव आर्थिक और चिकित्सीय मदद दी जाएगी। भले ही नोजल ड्रॉप से रोशनी जाने की बात खारिज हो गई है, लेकिन यह ड्रॉप अस्पताल परिसर में बच्चे के परिजनों तक कैसे पहुंचा, इस बात की पड़ताल के लिए विभाग की जांच अभी भी जारी है।