टीकमगढ़,मोहसिन अहमद। जिले में वन विभाग से जुड़ा एक मामला तूल पकड़ता जा रहा है, जहां मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मुख्य वन संरक्षक, छतरपुर पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। संघ का कहना है कि यह मामला न केवल प्रशासनिक बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा हुआ है।

अजाक्स के जिला अध्यक्ष डॉ. बी. पी. अहिरबार के अनुसार, जतारा वन परिक्षेत्र में पदस्थ वनक्षेत्रपाल शिशुपाल अहिरवार ने अपने कार्यकाल के दौरान उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने हजारों हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कराया और वन माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए अवैध वाहनों व मशीनों को जब्त किया। इसके साथ ही वन्यप्राणी अपराधों में शामिल कई लोगों की गिरफ्तारी भी सुनिश्चित की गई।

इसके बावजूद, संघ का आरोप है कि मुख्य वन संरक्षक द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्टीकरण के शिशुपाल अहिरवार के खिलाफ एक साथ चार आरोप पत्र जारी कर दिए गए। ये आरोप पत्र दिसंबर 2025 और अप्रैल 2026 में जारी किए गए हैं, जिन्हें अजाक्स ने पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताया है। संघ का कहना है कि आरोपों से संबंधित दस्तावेज मांगने के बावजूद अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिससे पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अजाक्स ने इस कार्रवाई को व्यक्तिगत और जातिगत द्वेष से प्रेरित बताते हुए मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाती है और क्या इस विवाद की निष्पक्ष जांच हो पाती है या नहीं।