नई परिवहन नीति के खिलाफ आर-पार की जंग: 2 मार्च से थम जाएंगे प्रदेश में बसों के पहिए

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सागर, जीशान खान | मध्यप्रदेश में नई परिवहन नीति को लेकर सरकार और निजी बस संचालकों के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मध्यप्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन के बैनर तले सागर में आयोजित राज्यस्तरीय सम्मेलन में प्रदेश के 55 जिलों के 400 से अधिक बस ऑपरेटरों ने हुंकार भरते हुए 2 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है।
'दमनकारी' नीति का विरोध सागर-बंडा रोड स्थित एक होटल में संतोष कुमार पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में वक्ताओं ने शासन की नई नीति को 'दमनकारी' करार दिया। बस संचालकों का आरोप है कि सरकार इस नीति के जरिए निजी बस व्यवसाय का 'अप्रत्यक्ष राष्ट्रीयकरण' करना चाहती है। प्राइम रूट एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने से मोटर मालिक महज किरायेदार बनकर रह जाएंगे, जिससे वर्षों पुराना निजी बस व्यवसाय पूरी तरह तबाह हो जाएगा।
हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट सम्मेलन में चिंता जताई गई कि यदि यह नीति वापस नहीं ली गई, तो हजारों ड्राइवरों, परिचालकों और अन्य कर्मचारियों की आजीविका छिन जाएगी। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में यात्री सुविधाओं पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा।
प्रमुख मांगें:
24 दिसंबर 2025 को राजपत्र में प्रकाशित संशोधन प्रारूप को तत्काल निरस्त किया जाए।
29 जनवरी 2026 के संशोधन को पूर्णतः समाप्त किया जाए।
वर्तमान में लागू पुरानी बस संचालन व्यवस्था को ही यथावत रखा जाए।
महामंत्री जयकुमार जैन और वीरेंद्र साहू के संचालन में हुए इस सम्मेलन में स्पष्ट किया गया कि यदि सरकार मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तो 2 मार्च से पूरे प्रदेश में यात्री बसों का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में अशोक श्रीवास्तव एवं अतुल दुबे ने आभार व्यक्त किया।
