श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। राजगढ़ के एक रसूखदार कारोबारी दंपती ने अपनी ढाई साल की गोद ली हुई बेटी को सिर्फ इसलिए नेशनल हाईवे-552 पर लावारिस फेंक दिया क्योंकि उन्हें लगता था कि बच्ची 'अशुभ' है। दंपती का मानना था कि जब से यह बच्ची घर आई है, उनका कारोबार घाटे में जा रहा है और इसे घर से निकालने पर ही उनकी तरक्की वापस लौटेगी।


श्योपुर पुलिस ने इस मामले में पेट्रोल पंप कारोबारी आकाश मूंदड़ा और उनकी पत्नी कृतिका मूंदड़ा को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में दंपती ने अपना जुर्म कबूल करते हुए इसे अंधविश्वास के चलते उठाया गया कदम बताया है।


18 अप्रैल को लावारिस मिली थी बच्ची

यह पूरी घटना 18 अप्रैल की है। श्योपुर के टोंक-चिरगांव नेशनल हाईवे पर सोंईकलां के पास यह मासूम बच्ची रोती हुई मिली थी। छोटी उम्र होने के कारण वह अपने माता-पिता के बारे में कुछ भी बताने में असमर्थ थी। पुलिस ने बच्ची को 'वन स्टॉप सेंटर' भेजा और उसकी पहचान के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाया। बच्ची की तस्वीर वायरल होने के बाद भोपाल की बबीता नाविक ने पुलिस से संपर्क किया और बच्ची की पहचान उजागर हुई।


केयर टेकर का खुलासा: "बच्ची को पीटा जाता था"

बच्ची की देखरेख करने वाली बबीता नाविक ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि आकाश और कृतिका ने इस बच्ची को तब गोद लिया था जब वह मात्र तीन महीने की थी। बबीता को 20 हजार रुपए महीने पर बच्ची की देखभाल के लिए रखा गया था। बबीता के अनुसार, दंपती बच्ची के साथ क्रूरता करते थे और उसे अक्सर पीटा जाता था। सैलरी न मिलने के कारण बबीता ने काम छोड़ दिया था।


रसूखदार परिवार, लेकिन भाई से अनबन

मूंदड़ा परिवार राजगढ़ के बड़े व्यापारिक घरानों में से एक है, जिनके पास कई पेट्रोल पंप और करोड़ों की संपत्तियां हैं। हालांकि, आरोपी आकाश के भाई अंकुश मूंदड़ा ने बताया कि आकाश पिछले पांच साल से परिवार से अलग रह रहा है। पारिवारिक बंटवारे में आकाश को कुरावर और खुजनेर के दो पेट्रोल पंप मिले थे, लेकिन आर्थिक स्थिति बिगड़ने के कारण उसके कुछ पंप बंद हो गए। इसी आर्थिक तंगी का कारण उसने मासूम बच्ची को मान लिया।


कानूनी प्रक्रिया के घेरे में 'गोद लेना'

आकाश की यह दूसरी शादी थी। पहली पत्नी से उसे एक बेटा है जो अपनी मां के साथ रहता है। दूसरी पत्नी से संतान न होने पर उसने इस बच्ची को गोद लिया था। अब श्योपुर की मानपुर पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि बच्ची को गोद लेने की प्रक्रिया कानूनी थी या नहीं। यदि गोद लेने में नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो आरोपियों पर मानव तस्करी सहित अन्य गंभीर धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं।


फिलहाल, मासूम बच्ची सुरक्षित है और पुलिस मामले की हर पहलू से विवेचना कर रही है। एक शिक्षित और संपन्न परिवार द्वारा इस तरह के अंधविश्वास में आकर मासूम की जान जोखिम में डालना पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।