पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बृहस्पति कुंड में बहुप्रतीक्षित 'ग्लास ब्रिज' (कांच का पुल) बनकर पूरी तरह तैयार हो गया है। हालांकि अभी इसका औपचारिक उद्घाटन होना बाकी है, लेकिन हवा में लटके इस रोमांचक ब्रिज को देखने के लिए अभी से ही पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। यहाँ पहुँचने वाले लोग इस अद्भुत नज़ारे के साथ सेल्फी, फोटो और रील बनाकर सोशल मीडिया पर जमकर साझा कर रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि मई महीने के अंत तक इसे आम जनता के लिए विधिवत खोल दिया जाएगा।
3 करोड़ की लागत और 11 मीटर हवा में लटका हिस्सा
ग्लास ब्रिज के निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे मप्र पर्यटन विकास निगम (MPT) के इंजीनियर विवेक चौबे ने बताया कि करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से इस शानदार ब्रिज का निर्माण किया गया है। लगभग 28 मीटर लंबे इस ब्रिज की सबसे खास बात इसका 11 मीटर का वह हिस्सा है, जो बिना किसी नीचे के सपोर्ट के पूरी तरह हवा में लटका हुआ है। इस पारदर्शी कांच पर खड़े होकर पर्यटक नीचे की अगाध गहराई, प्राचीन प्राकृतिक चट्टानों और चारों ओर फैले मनोरम दृश्यों का रोमांचक अनुभव कर सकेंगे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ब्रिज में उच्च गुणवत्ता वाली प्रमाणित ग्लास शीट्स लगाई गई हैं।
पहले स्थान के लिए जबलपुर के भेड़ाघाट से टक्कर
मध्य प्रदेश का पहला ग्लास ब्रिज होने का गौरव किसे मिलेगा, इसे लेकर पन्ना और जबलपुर में दिलचस्प होड़ है। दरअसल, ऐसा ही एक ग्लास ब्रिज जबलपुर के भेड़ाघाट में भी निर्माणाधीन है। तकनीकी रूप से दोनों में से जिस भी ब्रिज का उद्घाटन पहले होगा, वह मध्य प्रदेश का पहला आधिकारिक ग्लास ब्रिज कहलाएगा।
पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
बृहस्पति कुंड में सिर्फ ग्लास ब्रिज ही नहीं, बल्कि पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक विकास कार्य किए गए हैं। यहाँ भव्य मुख्य द्वार, सुव्यवस्थित पार्किंग, कैफेटेरिया, जन सुविधा पार्क, व्यू प्वाइंट और पाथ-वे (पैदल मार्ग) का निर्माण भी पूरा किया जा चुका है। इस ब्रिज के शुरू होने से न केवल पन्ना के पर्यटन को देशभर में एक नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के कई नए अवसर भी पैदा होंगे।
प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व का संगम
मानसून के दौरान बृहस्पति कुंड में करीब 300 फीट की ऊंचाई से गिरने वाला जलप्रपात पहले ही देशभर के प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करता रहा है, और अब यह ग्लास ब्रिज इस सौंदर्य में चार चांद लगा देगा। प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ इस स्थल का धार्मिक महत्व भी बेहद खास है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति ने इसी पवित्र स्थान पर बैठकर तपस्या की थी, और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम भी अपने वनवास काल के दौरान यहाँ पधारे थे। यही वजह है कि यह स्थल प्राकृतिक रोमांच के साथ-साथ आध्यात्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

