मुंबई। 5 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का एक बड़ा ही खास दिन माना जाता है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1960 में देश के सबसे सफल निवेशकों में से एक राकेश झुनझुनवाला का जन्म हुआ था। उन्हें भारतीय शेयर बाजार का 'बिग बुल' और 'भारत का वॉरेन बफेट' कहा जाता था। चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) रहे झुनझुनवाला ने सिर्फ 5,000 रुपए की शुरुआती पूंजी से निवेश का सफर शुरू किया और अपनी दूरदर्शी सोच, धैर्य और बेहतरीन निवेश रणनीति के दम पर करीब 40,000 करोड़ रुपए की संपत्ति खड़ी कर दी। यही कारण है कि आज भी उनकी निवेश शैली लाखों निवेशकों के लिए प्रेरणा का काम करती है।राकेश झुनझुनवाला का जन्म 5 जुलाई 1960 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता आयकर विभाग में अधिकारी थे और घर में अक्सर शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी चर्चाएं होती थीं। इन्हीं चर्चाओं ने उनके भीतर शेयर बाजार को समझने की उत्सुकता पैदा की।
उन्होंने मुंबई के सिडेनहैम कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और बाद में चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बने। हालांकि उनके पिता ने उन्हें निवेश के लिए सीधे पैसे नहीं दिए, लेकिन उन्होंने सलाह दी कि पहले बाजार को अच्छी तरह समझो। इसके बाद भाई और दोस्तों की मदद से जुटाई गई पूंजी के साथ उन्होंने 1985 में निवेश की शुरुआत की।
झुनझुनवाला की पहली बड़ी सफलता टाटा टी के शेयरों से मिली। उन्होंने कंपनी के शेयर करीब 43 रुपए प्रति शेयर के भाव पर खरीदे थे। कुछ ही महीनों में शेयर की कीमत बढ़कर 143 रुपए पहुंच गई, जिसके बाद उन्होंने इसे बेचकर शानदार मुनाफा कमाया। इस निवेश ने उन्हें बाजार में नई पहचान दिलाई और उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया।
1980 के दशक में उन्होंने बेहद सीमित पूंजी के साथ शेयर बाजार में कदम रखा। उस समय उनका सबसे बड़ा हथियार था - कंपनियों की गहराई से रिसर्च करना और लंबी अवधि का नजरिया रखना।
1986 से 1989 के बीच उन्होंने टाटा पावर जैसी कई बड़ी कंपनियों में निवेश किया। इसके बाद उन्होंने सेसा गोवा (अब वेदांता लिमिटेड) में उस समय निवेश किया, जब लौह अयस्क की कीमतों में गिरावट के कारण कंपनी मुश्किल दौर से गुजर रही थी। उन्होंने लगभग चार लाख शेयर खरीदे और कंपनी के बेहतर प्रदर्शन के साथ उन्हें भारी मुनाफा मिला।
इसी तरह प्राज इंडस्ट्रीज में भी उनका निवेश बेहद सफल रहा। बाजार के कमजोर दौर में खरीदे गए इस शेयर से उन्होंने लगभग 250 प्रतिशत का रिटर्न हासिल किया।
दिग्गज निवेशक के करियर का सबसे चर्चित निवेश टाइटन कंपनी रहा। 2000 के दशक की शुरुआत में जब कई निवेशक इस शेयर से दूरी बना रहे थे, तब उन्होंने इसमें बड़ा निवेश किया। समय के साथ टाइटन ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और यह उनके पोर्टफोलियो का सबसे मूल्यवान निवेश बन गया। इसी एक निवेश ने उनकी संपत्ति में हजारों करोड़ रुपए का इजाफा किया।
राकेश झुनझुनवाला केवल निवेशक ही नहीं, बल्कि सफल कारोबारी भी थे। उन्होंने अपनी निवेश कंपनी रेअर एंटरप्राइजेज के जरिए कई बड़े निवेश किए। इसके अलावा वे हंगामा मीडिया और एप्टेक के चेयरमैन भी रहे।
वर्ष 2022 में उन्होंने भारतीय विमानन क्षेत्र में प्रवेश करते हुए आकासा एयर की शुरुआत की, जिसे उनका एक बड़ा और महत्वाकांक्षी बिजनेस प्रोजेक्ट माना गया।
14 अगस्त 2022 को मुंबई में 62 वर्ष की आयु में राकेश झुनझुनवाला का निधन हो गया। उस समय उनकी अनुमानित कुल संपत्ति करीब 5.8 अरब अमेरिकी डॉलर, यानी लगभग 40,000 करोड़ रुपए थी। उनके जाने के बाद भी भारतीय शेयर बाजार में उनका योगदान और निवेश दर्शन निवेशकों का मार्गदर्शन करता है।
राकेश झुनझुनवाला का मानना था कि शेयर बाजार में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र गलतियों से सीखना और धैर्य बनाए रखना है। उनका कहना था कि निवेशक को बाजार के रोजाना के उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों पर भरोसा करना चाहिए।
वे हमेशा लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने की सलाह देते थे। उनका मानना था कि अच्छी कंपनियां समय के साथ निवेशकों को शानदार रिटर्न देती हैं। इसलिए छोटी अवधि की गिरावट या तिमाही नतीजों के आधार पर जल्दबाजी में फैसले नहीं लेने चाहिए।
झुनझुनवाला किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके कारोबार, वित्तीय स्थिति, प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं का गहराई से अध्ययन करते थे। उनका मानना था कि केवल भीड़ का अनुसरण करने के बजाय अपनी रिसर्च और विश्लेषण पर भरोसा करना चाहिए।
उनका कहना था कि शेयर बाजार में धैर्य सबसे बड़ी ताकत है। बाजार में गिरावट आना सामान्य बात है और ऐसे समय में घबराकर निवेश बेचने के बजाय सही कंपनियों में बने रहना चाहिए। वे निवेशकों को अपनी रणनीति पर विश्वास रखने और अफवाहों से दूर रहने की सलाह देते थे।
झुनझुनवाला हमेशा अलग-अलग सेक्टरों और कंपनियों में निवेश करने के पक्षधर थे। उनका मानना था कि विविधता से जोखिम कम होता है और किसी एक कंपनी या सेक्टर में कमजोरी आने पर पूरे पोर्टफोलियो पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।

