भोपाल मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में उस समय हड़कंप मच गया जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली 'ए-प्लस' श्रेणी की नोटशीट्स को अधिकारियों द्वारा दबाकर बैठने का मामला सामने आया। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाया और लंबित फाइलों का तुरंत निराकरण करने के कड़े निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की इस सख्ती के बाद मंत्रालय (वल्लभ भवन) में कई आला अधिकारियों को देर रात तक दफ्तरों में रुकना पड़ा और रात 12 बजे के बाद भी धड़ाधड़ कई सरकारी आदेश जारी किए गए।


क्या है 'ए-प्लस' नोटशीट और इसके नियम

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जारी होने वाली 'ए-प्लस' (A+) श्रेणी की नोटशीट में जनता से जुड़े विकास कार्य, नीतिगत फैसले और शासकीय सेवकों के तबादलों जैसे बेहद महत्वपूर्ण और सर्वोच्च प्राथमिकता वाले विषय शामिल होते हैं। शासकीय नियमों के अनुसार, इन नोटशीट्स पर संबंधित विभागों को अधिकतम 15 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लेना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद एसीएस (ACS) और पीएस (PS) स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इन पर फैसले नहीं लिए जा रहे थे, जिसके चलते पिछले दो महीनों में ऐसी लंबित नोटशीट्स की संख्या 800 से अधिक हो गई थी।


नोटशीट अटकाने में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विभाग सबसे आगे

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं की उपेक्षा करने में प्रदेश का नगरीय विकास एवं आवास विभाग सबसे आगे (नंबर वन) है। इस विभाग के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय हैं और प्रशासनिक प्रमुख एसीएस संजय दुबे हैं। विशेष बात यह है कि यह स्थिति तब सामने आई है जब हाल ही में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा इंदौर की कथित उपेक्षा का मुद्दा उठाया गया था। नगरीय विकास विभाग के अलावा जनजातीय कार्य, स्कूल शिक्षा और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भी मुख्यमंत्री की फाइलों को अटकाने में अग्रणी पाए गए हैं।


कैलाश विजयवर्गीय के 'वायरल पत्र' और यू-टर्न की पृष्ठभूमि

फाइलों के पेंडिंग होने की इस सूची के सामने आने के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का वह पत्र भी चर्चा में आ गया है, जो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। उस पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए इंदौर के मास्टर प्लान में देरी, उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के नामकरण, और राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के पुनर्गठन में इंदौर की अनदेखी का आरोप लगाया था। पत्र में इंदौर एयरपोर्ट के विस्तार, सिंहस्थ परियोजनाओं और पीथमपुर में औद्योगिक सुविधाओं की कमी का भी जिक्र था। हालांकि, बाद में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ते ही कैलाश विजयवर्गीय ने ऐसे किसी भी पत्र को लिखने से साफ इंकार करते हुए यू-टर्न ले लिया था।


सर्वोच्च प्राथमिकता के काम अटकाने वाले शीर्ष 10 विभाग और उनके जिम्मेदार

मुख्यमंत्री की समीक्षा रिपोर्ट में जिन विभागों में सबसे ज्यादा काम लंबित पाए गए हैं, उनकी सूची और उनके जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों के नाम इस प्रकार हैं:


  1. रैंक 01: नगरीय विकास एवं आवास विभाग — संजय दुबे (एसीएस)
  2. रैंक 02: स्कूल शिक्षा विभाग — डॉ. संजय गोयल (पीएस)
  3. रैंक 03: गृह विभाग — संजय कुमार शुक्ल (एसीएस)
  4. रैंक 04: जनजातीय कार्य विभाग — गुलशन बामरा (पीएस)
  5. रैंक 05: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग — दीपाली रस्तोगी (एसीएस)
  6. रैंक 06: स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग — अशोक बर्णवाल (एसीएस)
  7. रैंक 07: राजस्व विभाग — रमेश कुमार (पीएस)
  8. रैंक 08: लोक निर्माण विभाग (PWD) — सुखबीर सिंह (पीएस)
  9. रैंक 09: वन विभाग — संदीप यादव (पीएस)
  10. रैंक 10: जल संसाधन विभाग — डॉ. राजेश राजौरा (एसीएस)