भोपाल। मध्य प्रदेश के रेल यात्रियों और बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार ने उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाली 237 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन परियोजना को हरी झंडी दे दी है। ₹4,329 करोड़ की लागत वाला यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल प्रदेश की कनेक्टिविटी सुधारेगा, बल्कि राजधानी भोपाल के रेलवे स्टेशनों पर लगने वाले 'ट्रैफिक जाम' से भी निजात दिलाएगा।
भोपाल स्टेशन पर बढ़ेगी प्लेटफॉर्म की संख्या
इस नई परियोजना का सबसे बड़ा लाभ भोपाल मुख्य रेलवे स्टेशन को मिलने वाला है। वर्तमान में यहाँ केवल 6 प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं, जिसके कारण पीक सीजन में प्रतिदिन गुजरने वाली 150 से अधिक ट्रेनों को प्लेटफॉर्म खाली न होने की स्थिति में आउटर पर घंटों इंतजार करना पड़ता है। चौथी रेल लाइन के बिछने के साथ ही भोपाल स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर-7 तैयार करने की योजना है। इससे आउटर पर ट्रेनों की वेटिंग खत्म होगी और यात्री समय पर स्टेशन पहुंच सकेंगे।
मालवा एक्सप्रेस के पार्सल संकट से मिलेगी मुक्ति
वर्तमान में भोपाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3 छोटे पड़ रहे हैं। इंदौर से आने वाली मालवा एक्सप्रेस जैसे 22-24 कोच वाली ट्रेनों का पार्सल कोच प्लेटफॉर्म से बाहर निकल जाता है। स्थिति यह है कि भोपाल के पार्सल या तो इंदौर वापस चले जाते हैं या फिर सागर की ओर डायवर्ट हो जाते हैं, जिससे व्यापारी और आम जनता परेशान होती है। नया प्लेटफॉर्म बनने से कोच की लंबाई के अनुसार पर्याप्त जगह मिलेगी और यह समस्या दूर हो जाएगी।
रानी कमलापति और मुख्य स्टेशन के बीच संतुलन
परियोजना के तहत रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के ढांचे में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन चौथी लाइन यहाँ से भी गुजरेगी। गौरतलब है कि ₹100 करोड़ की लागत से बना आधुनिक रानी कमलापति स्टेशन फिलहाल अपनी क्षमता से कम उपयोग हो रहा है, जहाँ केवल 50 ट्रेनें रुकती हैं। वहीं मुख्य स्टेशन पर 150 यात्री ट्रेनों के साथ 50 मालगाड़ियों का भारी दबाव रहता है। नई लाइन बिछने से मुख्य स्टेशन का बोझ कम होगा और पूरे भोपाल रेल मंडल की कार्यक्षमता बढ़ेगी।
परियोजना की मुख्य बातें:
कुल लंबाई: 237 किलोमीटर।
कुल लागत: ₹4,329 करोड़।
प्रमुख लाभ: उत्तर और दक्षिण भारत के बीच ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी।
सुविधा: भोपाल स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की संख्या 6 से बढ़कर 7 होगी।



