जबलपुर। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की प्रभावी कार्रवाई के चलते अदालत ने एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। जबलपुर स्थित लोकायुक्त की विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने बिजली चोरी का प्रकरण खत्म करने के एवज में रिश्वत लेने वाले पूर्व जूनियर इंजीनियर (JE) कमलेश कसेरा को दोषी ठहराते हुए 4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही माननीय अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का आर्थिक अर्थदंड (जुर्बाना) भी लगाया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में लोकायुक्त के विशेष लोक अभियोजक प्रशांत शुक्ला ने सरकार की ओर से बेहद प्रभावी और मजबूत पैरवी की, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह फैसला दिया।
क्या था पूरा मामला और क्यों मांगी गई थी रिश्वत?
यह पूरा मामला वर्ष 2021 का है, जब आरोपी कमलेश कसेरा विद्युत विभाग में प्रेम सागर फीडर अधिकारी (जूनियर इंजीनियर) के पद पर पदस्थ थे।
- दुकान पर छापा: 15 फरवरी 2021 को जूनियर इंजीनियर कमलेश कसेरा ने शिकायतकर्ता सतीश चंद्र वंशकार के भाई के मकान में संचालित एक किराना दुकान की अचानक तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान उन्होंने वहां कथित तौर पर बिजली चोरी पकड़ी और इसका एक अवैध प्रकरण शिकायतकर्ता के बुजुर्ग पिता के नाम पर दर्ज कर दिया।
- रिश्वत की डिमांड: जब सतीश चंद्र वंशकार इस बने हुए केस को रफा-दफा करने और अपने पिता का नाम हटाने के सिलसिले में आरोपी अधिकारी से मिले, तो कमलेश कसेरा ने विद्युत चोरी का प्रकरण पूरी तरह खत्म करने के एवज में 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की।
- पहली किस्त का भुगतान: बातचीत और सौदेबाजी के दौरान पीड़ित ने मौके पर ही आरोपी को 5 हजार रुपये नगद दे दिए। इसके बाद बची हुई 5 हजार रुपये की शेष राशि का भुगतान करने के लिए शिकायतकर्ता ने आरोपी अधिकारी से 2 से 3 दिनों का समय मांगा था।
5 हजार रुपये लेते ही लोकायुक्त की टीम ने रंगे हाथ दबोचा
चूंकि शिकायतकर्ता रिश्वत देने के पक्ष में नहीं था, इसलिए उसने 18 फरवरी 2021 को पूरे मामले की लिखित शिकायत लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक (SP) से कर दी। लोकायुक्त की टीम ने शिकायत की सत्यता को जांचने के लिए पीड़ित को एक रिकॉर्डर दिया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हो गई। इसके बाद लोकायुक्त ने आरोपी को रंगे हाथ दबोचने के लिए एक सुनियोजित जाल (ट्रैप) बिछाया।
तय की गई योजना के अनुसार, शिकायतकर्ता सतीश चंद्र वंशकार बाकी के 5 हजार रुपये लेकर कांचघर स्थित विद्युत विभाग के जोन-2 कार्यालय पहुंचे। जैसे ही कार्यालय के भीतर आरोपी जूनियर इंजीनियर कमलेश कसेरा ने शेष 5 हजार रुपये की रिश्वत की राशि अपने हाथ में ली, ठीक उसी दौरान वहां सादे कपड़ों में पहले से तैनात लोकायुक्त की विशेष टीम ने धाबा बोल दिया। टीम ने आरोपी को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया और केमिकल से हाथ धुलवाने पर उसके हाथ पूरी तरह गुलाबी हो गए। इस कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया था।
साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने तय की 4 साल की सजा
गिरफ्तारी और विस्तृत विवेचना के बाद लोकायुक्त पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूतों के साथ माननीय अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) पेश की गई थी। लोकायुक्त के विशेष लोक अभियोजक प्रशांत शुक्ला ने अदालत के समक्ष गवाहों के बयान, रिश्वत के पैसों की बरामदगी की पावती और ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे अकाट्य साक्ष्य प्रस्तुत किए।
दोनो पक्षों की लंबी बहस और दलीलों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने माना कि लोक सेवक के पद पर रहते हुए आरोपी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। अदालत ने आरोपी कमलेश कसेरा को दोषी पाते हुए 4 साल की जेल की सजा मुकर्रर की। प्रशासनिक हल्कों में इस कड़े फैसले की काफी चर्चा है और इसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एक बड़ा सबक माना जा रहा है।

