नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने शनिवार को राम मंदिर चंदा विवाद, भारत की विदेश नीति समेत कई मुद्दों पर अपनी बातें रखीं। भारत की विदेश नीति और कूटनीति को लेकर कांग्रेस सांसद ने कहा कि देश की अंतरराष्ट्रीय स्थिति पहले की तुलना में कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने देखा है कि भारत पहले किस स्थिति में खड़ा था और आज कहां खड़ा है। कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने विदेश नीति से जुड़े मुद्दों को तथ्यों के साथ सामने रखा और वर्तमान सरकार ने भारत की विदेश नीति तथा कूटनीति का मजाक बना दिया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा दिए गए उस बयान पर, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करीबी मित्र बताते हुए अगले वर्ष ट्रंप के भारत दौरे की संभावना जताई थी, इमरान मसूद ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने भारत के बाजार और आर्थिक हितों के साथ समझौता किया है। यदि भारत का व्यापारी और किसान नुकसान की स्थिति में पहुंचता है और अमेरिका का बाजार मजबूत होता है, तो स्वाभाविक रूप से अमेरिकी नेतृत्व भारत सरकार की प्रशंसा करेगा।
आरएसएस को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह उनका और उनके संगठन का आंतरिक विषय है। हालांकि, संघ की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी विचारधारा, जो समाज में नफरत फैलाने का काम करती हो, देश और देशवासियों के लिए हितकारी नहीं हो सकती।
राम मंदिर चंदा चोरी और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले पर मसूद ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब मंदिरों को लूटने वाले नए लोग सामने आए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है और वास्तविक जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। पूरे मामले में लीपापोती की जा रही है। जिन लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है या जेल भेजा जा रहा है, वे इतने बड़े स्तर की कथित वित्तीय अनियमितता को अंजाम देने की क्षमता नहीं रखते। छोटे कर्मचारियों और सहयोगियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि असली जिम्मेदार लोगों तक जांच नहीं पहुंच रही।
कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने के फैसले पर इमरान मसूद ने कहा कि यह पार्टी का आंतरिक संगठनात्मक निर्णय है। उन्होंने गौतम को एक प्रभावशाली दलित चेहरा बताते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति से पार्टी को निश्चित रूप से राजनीतिक लाभ मिलेगा और संगठन को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोई सकारात्मक उपलब्धि होती है तो उसका श्रेय लेने में सरकार आगे रहती है, लेकिन जब किसी मामले में आलोचना होती है तो उस पर प्रतिक्रिया देने से बचा जाता है।

