Sunday, March 1, 2026

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मध्य प्रदेशसतनाशाकाहारी की जगह मांसाहारी डिश भेजने पर डोमिनोज पर 8 लाख का जुर्माना

शाकाहारी की जगह मांसाहारी डिश भेजने पर डोमिनोज पर 8 लाख का जुर्माना

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PeptechTime
1 मार्च 2026, 11:55 am IST
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सतना,अंबिका केशरी। सतना शाकाहारी भोजन के स्थान पर मांसाहारी डिश भेजना रीवा रोड स्थित डोमिनोज पिज्जा को महंगा पड़ गया। मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने रेस्टॉरेंट संचालक कंपनी जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड पर 8 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ एक माह के भीतर जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा आयोग ने परिवादी दंपति को 10 हजार रुपये परिवाद व्यय देने का आदेश भी पारित किया है।



यह निर्णय आयोग के अध्यक्ष एस.सी. उपाध्याय तथा सदस्य उमेश गिरि और विद्या पांडेय की पीठ ने सुनाया।

मामला जिले के महादेवा निवासी सूरज तिवारी और उनकी पत्नी नैंसी तिवारी से जुड़ा है। परिवाद के अनुसार 31 अक्टूबर 2024 को दीपावली के अवसर पर दंपति ने डोमिनोज से कोरियन पनीर टिक्का गार्लिक ब्रेड ऑर्डर किया था। परिवार आजीवन शाकाहारी है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मांसाहार वर्जित है।


दीपावली के दिन धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भोजन करते समय सूरज तिवारी को गार्लिक ब्रेड के स्वाद और गंध पर संदेह हुआ। जांच करने पर ब्रेड के भीतर मांस के टुकड़े पाए गए। इसके बाद परिवार ने खाद्य पदार्थ की तस्वीरें लेकर रेस्टॉरेंट प्रबंधन से संपर्क किया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अंततः लीगल नोटिस भेजकर जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया गया।


कंपनी की ओर से दलील दी गई कि प्रस्तुत तस्वीरें स्पष्ट नहीं हैं, जिससे आरोप सिद्ध नहीं होते। साथ ही यह भी कहा गया कि शाकाहारी और मांसाहारी उत्पादों की पैकिंग अलग-अलग निशान के साथ की जाती है, इसलिए शिकायत निराधार है। हालांकि आयोग ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।


जांच और खाद्य परीक्षण रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि ऑर्डर में गार्लिक ब्रेड की जगह पनीर ब्रेड भेजी गई थी, जिसमें दुर्गंध और असामान्य स्वाद पाया गया तथा उसमें मांस के अवशेष मौजूद थे। इसे अनुचित व्यापार प्रथा मानते हुए आयोग ने कंपनी को दोषी ठहराया।


आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि जहां शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन तैयार किए जाते हैं, वहां अलग-अलग रसोईघर, अलग कर्मचारी और अलग ऑर्डर व्यवस्था होनी चाहिए। एक ही रसोई में काम होने से गलत ऑर्डर की संभावना रहती है, जिससे उपभोक्ताओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। आयोग ने होटल और रेस्टॉरेंट संचालकों को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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