अगर MP के इस रिटायर IFS अधिकारी के सुझाव पर सरकार अमल करे तो MP बन सकता है 'ग्रीन स्टेट'?

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छतरपुर/भोपाल (पंकज यादव)। मध्य प्रदेश की 'लाड़ली बहना योजना' के विशाल नेटवर्क का उपयोग अब पर्यावरण संरक्षण के लिए करने का एक क्रांतिकारी सुझाव सामने आया है। भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी एस.पी.एस. तिवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर एक विशेष नवाचार करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि यदि प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक लाड़ली बहनें हर साल 5 पौधे रोपें और उनकी देखभाल करें, तो मध्य प्रदेश आने वाले समय में देश का अग्रणी 'ग्रीन स्टेट' बन सकता है।
रिटायर अधिकारी श्री तिवारी ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में उल्लेख किया है कि प्रदेश में लगभग 1.25 करोड़ लाड़ली बहनें हैं। यदि प्रत्येक बहन प्रतिवर्ष केवल 5 पौधे रोपित करने और उन्हें वृक्ष बनाने की जिम्मेदारी ले, तो 1 साल में लगभग 6 करोड़ से अधिक पौधे रोपित होंगे। 5 साल में प्रदेश भर में लगभग 31 करोड़ पौधे वृक्ष का रूप ले लेंगे। यह मुहिम न केवल विकास कार्यों के कारण हो रही पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की भरपाई करेगी, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को रोकने में भी मील का पत्थर साबित होगी।
कार्बन क्रेडिट और प्रमाण-पत्र का प्रस्ताव
श्री तिवारी ने सुझाव दिया है कि इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लाड़ली बहनों को 'कार्बन क्रेडिट योजना' से जोड़ा जाए। उन्होंने पत्र में लिखा है कि जिन लाड़ली बहनों का प्रदर्शन पौधारोपण और उनकी उत्तरजीविता (Survival) में उत्कृष्ट रहेगा, उन्हें शासन की ओर से प्रमाण-पत्र देने का प्रावधान रखा जाए। इससे न केवल बहनों का उत्साह बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी भी तय होगी।
तकनीकी मार्गदर्शन और विभागों का समन्वय
पत्र में मुख्यमंत्री को सलाह दी गई है कि पौधों की व्यवस्था और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए वन विभाग एवं उद्यानिकी विभाग को संयुक्त जिम्मेदारी सौंपी जाए। चूंकि वन्य प्राणी, जैव विविधता और पर्यावरण मंत्रालय वर्तमान में मुख्यमंत्री के ही अधीन हैं, इसलिए इस योजना को लागू करना और अधिक सुगम हो सकता है। सुझाव में फलदार और दीर्घकालिक वानिकी वृक्षों के रोपण पर जोर दिया गया है, जिससे भविष्य में वन आवरण में व्यापक वृद्धि हो सके।
पर्यावरण संरक्षण का बड़ा मॉडल
रिटायर अधिकारी का यह पत्र वर्तमान में चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि सरकार इस दिशा में कदम उठाती है और लाड़ली बहना योजना जैसे बड़े सामाजिक ढांचे को पर्यावरण से जोड़ती है, तो यह विश्व स्तर पर सामुदायिक वृक्षारोपण का एक अनूठा उदाहरण बन सकता है। फिलहाल, इस नवाचार पर सरकार के अगले कदम का इंतजार है।


