भोपाल। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) द्वारा आज घोषित किए गए 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षा परिणामों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आए क्रांतिकारी बदलाव पर मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री ने स्वयं परिणाम जारी करते हुए इसे "स्वर्णिम मध्य प्रदेश" की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। इस वर्ष के परिणाम केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह डॉ. मोहन यादव सरकार की उस समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नीति की जीत है, जिसने पिछले 16 वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए प्रदेश को सफलता के नए शिखर पर पहुँचा दिया है।


16 साल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन: मोहन सरकार की नीतियों का प्रतिफल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस वर्ष 12वीं का परीक्षा परिणाम 76.01% रहा है, जो पिछले 16 वर्षों के इतिहास में सबसे शानदार और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। वहीं, 10वीं का पास प्रतिशत 73.42% दर्ज किया गया। परिणामों में आई यह उछाल स्पष्ट करती है कि सरकार के निरंतर नवाचार और छात्रहित योजनाओं ने प्रदेश की शैक्षिक आधारशिला को मजबूत किया है। सीएम ने बधाई देते हुए कहा कि बच्चों की यह सफलता प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की गाथा पेश कर रही है।


शासकीय स्कूलों ने निजी संस्थानों को पछाड़ा: धरातल पर दिखी मेहनत

मोहन सरकार के कार्यकाल में सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि लंबे समय बाद सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों को पछाड़ दिया है। 10वीं की परीक्षा में शासकीय स्कूलों का पास प्रतिशत 76.80% रहा, जो निजी स्कूलों की तुलना में काफी बेहतर है। यह आंकड़ा उन आलोचकों के लिए करारा जवाब है जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते थे। सरकार की सांदीपनी स्कूल जैसी महत्वाकांक्षी योजना, बेहतर अधोसंरचना और शिक्षकों की जवाबदेही का ही परिणाम है कि आज सरकारी स्कूलों में न केवल नामांकन बढ़ रहा है, बल्कि छात्र निजी संस्थानों को छोड़कर यहाँ प्रवेश ले रहे हैं।


आदिवासी बाहुल्य जिलों की 'स्वर्णिम' सफलता

इस वर्ष के नतीजों की सबसे सुखद तस्वीर जनजातीय और अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों से निकलकर सामने आई है। अनूपपुर (98%), अलीराजपुर (92%) और झाबुआ (93.23%) जैसे जिलों ने पूरे प्रदेश की मेरिट और पास प्रतिशत में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इन पिछड़े माने जाने वाले अंचलों में बच्चों का उत्कृष्ट रिजल्ट यह प्रमाणित करता है कि मोहन सरकार की शिक्षा योजनाएं समाज के अंतिम छोर तक गुणवत्तापूर्ण तरीके से पहुँच रही हैं। यह समावेशी विकास की वह मिसाल है, जहाँ संसाधनों की कमी पर प्रतिभा और सरकारी प्रोत्साहन की जीत हुई है।


आत्मविश्वास बढ़ाने वाली योजनाएं और नई शिक्षा नीति का प्रभाव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परिणामों का श्रेय विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत और सरकार के प्रोत्साहन को दिया। उन्होंने कहा कि मेधावी छात्र सम्मान योजना, स्कूटी, साइकिल और लैपटॉप वितरण जैसी योजनाओं ने छात्रों में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आत्मविश्वास पैदा किया है। नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने का ही नतीजा है कि अब छात्रों का साल खराब नहीं होगा और मई में ही दोबारा परीक्षा का विकल्प मिलेगा। डॉ. मोहन यादव की सरकार शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे कौशल और आत्मविश्वास से जोड़ रही है, जिससे ड्रॉपआउट दर में कमी आई है और मध्य प्रदेश अब देश के अग्रणी 'एजुकेशन हब' के रूप में उभर रहा है।