दमोह, राजेन्द्र तिवारी। सनातन धर्म की आस्था के केंद्र गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए आज बटियागढ़ में एक ऐतिहासिक प्रदर्शन देखा गया। सोमवार को विभिन्न हिंदू संगठनों और साधु-संतों के नेतृत्व में हजारों की संख्या में गौभक्त सड़कों पर उतरे। इस रैली का मुख्य उद्देश्य गौमाता को संवैधानिक रूप से 'राष्ट्रमाता' का दर्जा दिलाने की मांग को बुलंद करना था। बटियागढ़ की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब! 'गौसम्मान आव्हान अभियान' के तहत हजारों गौसेवकों ने भरी हुंकार। साधु-संतों की उपस्थिति में निकाली गई विशाल रैली, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन।
रैली के दौरान हिंदू संगठनों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में चार प्रमुख मांगों पर जोर दिया गया है:
गौमाता को अविलंब 'राष्ट्रमाता' का दर्जा प्रदान करना।
देशभर में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध हेतु कठोर कानून का निर्माण।
सरकारी स्तर पर गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के पुख्ता इंतजाम।
सड़कों पर विचरने वाले गौवंश के लिए उचित आश्रय (गौशाला) और चारे की व्यवस्था।
इस विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी ताकत जनसमर्थन रहा। संगठनों द्वारा चलाए गए व्यापक अभियान के तहत 17,900 लोगों के हस्ताक्षर युक्त पत्र अधिकारियों को सौंपे गए। यह इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र की जनता गौवंश की सुरक्षा के प्रति कितनी गंभीर है। भगवा ध्वजों और 'गौमाता की जय' के नारों से पूरा बटियागढ़ गुंजायमान हो उठा। हाथों में तख्तियां लिए युवाओं और बुजुर्गों का उत्साह देखते ही बन रहा था। संतों के सान्निध्य ने इस आंदोलन को और अधिक ऊर्जा प्रदान की। संगठनों के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि— "यह केवल एक ज्ञापन नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सवाल है।"


