मुंबई। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने महाराष्ट्र में चल रही राजनीतिक गतिविधियों सहित कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी।गाजा को लेकर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की ओर से लिखे गए लेख पर हुसैन दलवई ने कहा कि इजरायल की ओर से गाजा में जिस तरह से लोगों को मारा जा रहा है, यह बिल्कुल गलत है। यह गाजा की बात नहीं, बल्कि इंसानियत की बात है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह सरकार इंसानियत मानती नहीं है। गाजा के लोगों के साथ सरकार को खड़ा रहना चाहिए और इजरायल से युद्ध बिल्कुल बंद करने को कहना चाहिए।
उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा विवाद मामले में एसआईटी की रिपोर्ट को लेकर कहा कि मेरे अनुसार इस मामले में कुछ किया नहीं जाएगा। सिर्फ दिखाया जाएगा कि कार्रवाई की जा रही है। छोटे-छोटे लोगों को पकड़कर कुछ दिनों के लिए जेल भेजेंगे। यह सारा पैसा गया कहां, क्या हुआ, इसका खुलासा कहां किया गया।
भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर हुसैन दलवई ने कहा कि आरएसएस में अच्छे लोग कहां हैं? उनको हिंसा करना, मुसलमानों के खिलाफ बोलना और द्वेष फैलाना सिखाया जाता है। आरएसएस की शाखा में जाने वाला अच्छा कैसे हो सकता है?
एक ही फ्लाइट से उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के जाने को लेकर हुसैन दलवई ने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस के सरकारी विमान में बैठकर उद्धव ठाकरे नहीं गए। दोनों लोग अपने-अपने टिकट से कमर्शियल विमान से गए। कोई कहीं भी मिल सकता है और मिलने के बाद बातचीत तो होती ही है। राजनीति में व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं होती। इसके लेकर बहुत चर्चा करने की जरूरत नहीं है।
शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिंदे गुट में जाने को लेकर उन्होंने कहा कि सांसदों ने गद्दारी की है। यह संविधान और देश के साथ गद्दारी है।
बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ओर से यूसीसी को लेकर दिए बयान पर हुसैन दलवई ने कहा कि उसका ड्रॉफ्ट तो लोगों तक पहुंचाना चाहिए। मेरा कहना है कि महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। धर्म में बिल्कुल भी नहीं कहा गया है कि तीन-तीन शादी करो।
केतन हत्याकांड को लेकर हुसैन दलवई ने कहा कि उसके साथ बिल्कुल गलत हुआ है, लेकिन ऐसा हुआ क्यों इसको लेकर भी जांच की जानी चाहिए। इसमें लड़की के माता-पिता भी जिम्मेदार हैं। बेटियों पर शादी का दबाव बनाने से ऐसी घटनाएं घटती हैं। लड़कियों को जीवनसाथी चुनने का मौका देना चाहिए। दबाव बनाने से लड़कियों के दिमाग में ऐसी घटनाओं के अंजाम देने की बात आती है। व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।

