छिंदवाड़ा, जीशान अंसारी। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में मुहर्रम की 8 तारीख पर निकलने वाली ऐतिहासिक नाले हैदर की सवारी इस वर्ष भी पूरे धार्मिक उल्लास, अकीदत और पारंपरिक वैभव के साथ निकाली गई। बड़े इमामबाड़ा स्थित दरबार से शुरू हुई यह ऐतिहासिक सवारी शहनाई और बाजों की मधुर धुनों के बीच अपने निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए नाल साहब पहुंची। वहां ज़ियारत के बाद सवारी बड़े इमामबाड़ा ताजिया पहुंची और फिर वापस अपने मुकाम पर लौटकर संपन्न हुई।


शहर की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सवारियों में शामिल इस आयोजन को देखने के लिए हजारों की संख्या में अकीदतमंद और आमजन उमड़े। पूरे मार्ग पर श्रद्धा, अनुशासन और भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सवारी के स्वागत में लोगों ने जगह-जगह व्यवस्थाएं कीं और अकीदत के साथ इसमें सहभागिता निभाई।


सवारी कमेटी के सदस्यों ने बताया कि नाले हैदर की सवारी केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि छिंदवाड़ा की गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सौहार्द की जीवंत मिसाल है। इस आयोजन में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और जैन समाज के लोग एक साथ शामिल होकर आपसी भाईचारे का संदेश देते हैं।


कमेटी ने बताया कि मरहूम नईम बाबा के इंतकाल के बाद अब उनके बेटे इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। परंपरा के अनुसार उन्होंने 40 कदम का सफर तय कर रस्म को अदा किया। कमेटी का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह ऐतिहासिक सवारी पुनः अपने पूर्ण स्वरूप में पूरा सफर तय करेगी।


सवारी के शांतिपूर्वक संपन्न होने पर कमेटी ने जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा आम नागरिकों का आभार व्यक्त किया। कमेटी ने कहा कि लोगों के सहयोग, प्रेम और आपसी सद्भाव ने इस ऐतिहासिक परंपरा को आज भी जीवंत बनाए रखा है।