भरतपुर। कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ की पहलवान शालिना सायर सिद्दी ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (केआईयूजी) में महिलाओं की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। यह सिद्दी समुदाय से आने वाली शालिना का पहला केआईयूजी पदक है।
लोहागढ़ स्टेडियम में हुए मुकाबले में शालिना ने हरियाणा की भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय की भानु को 2-1 से हराकर कांस्य हासिल किया। शालिना ने खुशी जताते हुए साईं मीडिया से कहा,“मैं पहले भी खेलो इंडिया यूथ गेम्स में हिस्सा ले चुकी हूं, लेकिन यह मेरा पहला केआईयूजी था। मुझे उम्मीद थी कि मैं पदक जीतूंगी, बस रंग तय नहीं था। पदक जीतकर बहुत खुशी हो रही है।”
उन्होंने बताया कि वे तीन दिन की कठिन ट्रेन यात्रा करके भरतपुर पहुंचीं, लेकिन अब अपने प्रयासों को सफल देखकर सारी थकान मिट गई है।शालिना ने मुस्कुराते हुए कहा, “हमारी यात्रा मुश्किल थी, लेकिन अब जीत से सब सार्थक लग रहा है।” भारत में रंगभेद जैसी सामाजिक चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन शालिना ने बताया कि उन्हें कभी ऐसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा, “मैं धारवाड़ में बड़ी हुई हूं और स्थानीय बच्चों के साथ खेलते हुए कभी भेदभाव महसूस नहीं किया। खेल की वजह से लोग सम्मान देते हैं।”
साक्षात्कार के दौरान शालिना ने प्रो कबड्डी लीग में बंगाल वॉरियर्स के खिलाड़ी सुशील मोतेश कांबरेकर का भी ज़िक्र किया, जो उसी समुदाय से आते हैं। उन्होंने कहा, “वे हमारे समुदाय के लिए बड़ी प्रेरणा हैं। मैं भी उनका जैसा नाम कमाकर सबको गर्व महसूस कराना चाहती हूं।”
शालिना की बहन बेंगलुरु पुलिस में कार्यरत है, जिससे उन्हें परिवार से भी प्रेरणा मिलती है। शालिना की इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया है कि खेलो इंडिया का मंच न केवल प्रतिभा को निखारता है बल्कि समाज के हाशिये पर खड़े समुदायों को भी आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करता है।
सिद्दी समुदाय की पहलवान शालिना सायर ने खेलो इंडिया में कांस्य पदक जीतकर रचा इतिहास

Anubhav Mishra
15 मई 2026, 09:01 pm IST
Anubhav Mishra15 मई 2026, 09:01 pm IST
