भोपाल। मध्यप्रदेश में पिछले दो दशक से सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी के उन आम कार्यकर्ताओं के लिए अच्छी खबर है, जो लंबे समय से 'सत्ता की रेवड़ी' के स्वाद से वंचित थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष पहल पर अब जिला स्तर की सरकारी और सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इसी माह नियुक्तियों की आधिकारिक घोषणाएं कर दी जाएंगी।
मुख्यमंत्री और संगठन के बीच लंबा मंथन
सत्ता और संगठन के बीच चले लंबे विचार-विमर्श के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि निगम, मंडल और प्राधिकरणों के साथ-साथ अब जिला स्तर पर भी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाए। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर सभी जिला इकाइयों से नामों की फेहरिस्त मांग ली गई है। राजधानी से लेकर जिलों तक, नगर अध्यक्षों ने विधायकों और कोर कमेटी के सदस्यों से एक सप्ताह के भीतर समन्वय बनाकर सूची सौंपने को कहा है।
इन 25 प्रमुख समितियों में मिलेगी जगह
उमा भारती के कार्यकाल में गठित हुईं ये समितियां लंबे समय से ठंडे बस्ते में थीं। अब जिन प्रमुख विभागों में नियुक्तियां होनी हैं, उनमें शामिल हैं:
परिवहन एवं कृषि: आरटीओ समिति और उद्यानिकी विभाग की समितियां।
सामाजिक एवं न्याय: जेल विभाग का विजिटर बोर्ड, पशु क्रूरता निवारण और सामाजिक न्याय समिति।
शिक्षा एवं विकास: जनभागीदारी समिति (कॉलेज), आइटीआइ कौशल समिति और शिक्षा अनुदान समिति।
जनहित: खाद्य विभाग की सतर्कता समिति, जिला योजना समिति, अंत्योदय समिति और खनिज निधि समिति।
विधायक बनाम संगठन: नियुक्तियों में किसका पलड़ा भारी?
इस नियुक्ति प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। चर्चा है कि अब संगठन के बजाय 'विधायक आधारित' नियुक्तियों का चलन बढ़ गया है। बूथ से लेकर मंडल तक विधायकों की पसंद को तरजीह दी जा रही है। हालांकि, इससे उन समर्पित कार्यकर्ताओं में थोड़ी चिंता भी है जो किसी विशेष गुटबाजी का हिस्सा नहीं हैं।
एल्डरमैन के पदों पर भी खींचतान
नगर निगम परिषद के कार्यकाल का अब केवल एक वर्ष शेष है, ऐसे में 12 एल्डरमैन पदों के लिए भी रस्साकशी तेज हो गई है। जहाँ एक ओर विधायक अपनी पसंद के नाम आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सांसद शंकर लालवानी और महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी अपने समर्थकों को जगह दिलाने के लिए तर्क दे रहे हैं। समन्वय के लिए फॉर्मूला बनाया जा रहा है कि आधे पद विधायकों की पसंद से और शेष संगठन व वरिष्ठ नेताओं की सहमति से भरे जाएं।
कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर
शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में कई बार नाम मांगे गए लेकिन नियुक्तियां अटक गईं। इस बार मोहन सरकार के कड़े रुख को देखते हुए कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि इस महीने उनका इंतजार खत्म होगा और उन्हें सरकार का हिस्सा होने का वास्तविक अहसास होगा।



