नई दिल्ली, 29 अप्रैल । आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट की जज को लिखे गए पत्र और उसमें ‘सत्याग्रह’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्याग्रह एक पवित्र अवधारणा है, जिसका उपयोग बेहद गंभीर और नैतिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए सवाल उठाया कि यह कैसा सत्याग्रह है, जिसमें कोई व्यक्ति खुद को निर्दोष बताते हुए किसी जज पर आपत्ति जताता है। उन्होंने इसे अराजकता करार देते हुए कहा कि राजनीति में इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उन्होंने स्वर्ण कांता शर्मा का समर्थन करते हुए कहा कि देश में महिला जजों की संख्या पहले ही कम है और इस तरह की टिप्पणियां उनके सम्मान को ठेस पहुंचाती हैं।
पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए मालीवाल ने कहा कि राज्य से अक्सर हिंसा और डरावनी घटनाओं की तस्वीरें सामने आती हैं, खासकर चुनावों के दौरान। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं की कथित गुंडागर्दी के कारण वहां का माहौल प्रभावित होता है और इसी वजह से भारतीय जनता पार्टी को समर्थन मिल रहा है।
इसके अलावा, आप दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज द्वारा राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की शादी को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी मालीवाल ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसी की निजी जिंदगी पर इस तरह की टिप्पणी करना गलत है।
उन्होंने परिणीति चोपड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि उनके बारे में इस तरह की बातें करना शर्मनाक है। मालीवाल ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी में यह एक प्रवृत्ति बनती जा रही है कि लोग व्यक्तिगत हमले करते हैं, जो राजनीति के स्वस्थ माहौल के लिए ठीक नहीं है।
एमसीडी मेयर चुनाव के बहिष्कार के मुद्दे पर भी मालीवाल ने 'आप' की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पूरे चुनाव का बहिष्कार कर दिया है, जो उनके अनुसार गलत रणनीति है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल कभी-कभी बच्चों जैसा व्यवहार करते हैं और जब उन्हें हार का अंदेशा होता है तो वे मैदान छोड़ देते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का माहौल गर्म कर दिया है।

