बीना, बृजेन्द्र सिंह राजपूत। बीपीसीएल बीना रिफाइनरी के आसपास पांच किलोमीटर के दायरे में लागू नो डेवलपमेंट जोन का मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है। रिफाइनरी से प्रभावित 52 गांवों के किसानों एवं स्थानीय रहवासियों ने शनिवार को प्रेसवार्ता कर नो डेवलपमेंट कमेटी और प्रशासन पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया।

किसानों का कहना है कि नो डेवलपमेंट जोन के नियमों के चलते उन्हें अपने घर, दुकान या अन्य स्थायी एवं अस्थायी निर्माण की अनुमति नहीं दी जाती। निर्माण शुरू करते ही प्रशासन कार्रवाई कर कार्य रुकवा देता है। वहीं दूसरी ओर रिफाइनरी विस्तार कार्य में लगी निजी कंपनियों ने रिफाइनरी के समीप अपने प्लांट स्थापित कर लिए हैं तथा वहां सैकड़ों कर्मचारियों के रहने की भी व्यवस्था कर दी गई है।

प्रेसवार्ता में किसानों ने आरोप लगाया कि रिफाइनरी की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठने के बावजूद कंपनियों के अस्थायी कैंप और निर्माण अब तक नहीं हटाए गए। उन्होंने बताया कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा कंपनियों को 25 जून तक कैंप हटाने की समय-सीमा भी दी गई थी, लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।

किसानों ने मांग की कि प्रशासन सभी के लिए समान नियम लागू करे। यदि कंपनियों को निर्माण की अनुमति दी जा रही है तो 52 गांवों के किसानों और स्थानीय नागरिकों को भी अपने मकान एवं अन्य निर्माण कार्य की अनुमति दी जाए। अन्यथा कंपनियों द्वारा किए गए निर्माण भी हटाए जाएं।

प्रेसवार्ता में किसानों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन जल्द निष्पक्ष निर्णय नहीं लेता है तो प्रभावित गांवों के किसान आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे और सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।