नई दिल्ली। आजकल फिट रहने के लिए लोग तरह-तरह की एक्सरसाइज करते हैं। कोई सुबह-सुबह वॉक पर निकल जाता है, कोई रनिंग करता है, तो कोई योग और मेडिटेशन को अपनाता है। वहीं, जब भी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की बात आती है, तो अक्सर लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ बॉडीबिल्डर्स के लिए जरूरी होती है। हालांकि लेकिन ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में ऑनलाइन प्रकाशित एक नई स्टडी आपकी इस सोच को पूरी तरह बदल देगी।नई स्टडी के मुताबिक, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सिर्फ मसल्स बनाने या बॉडीबिल्डिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उम्र और हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। यह न सिर्फ शरीर को मजबूत बनाती है, बल्कि लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य में भी अहम भूमिका निभा सकती है। यह अध्ययन ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है, जिसमें करीब 1.47 लाख लोगों के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया गया। इन लोगों को लगभग 30 साल तक फॉलो किया गया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने उनकी एक्सरसाइज की आदतों को समझा कि कौन लोग कार्डियो करते हैं, कौन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं और कौन दोनों का संतुलन बनाए रखते हैं।
स्टडी में सामने आया कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने वालों में कई गंभीर बीमारियों से होने वाले खतरे कम पाए गए। खासकर दिल की बीमारी, कैंसर और समय से पहले मौत के जोखिम में कमी देखी गई। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इसके लिए घंटों जिम में समय बिताने की जरूरत नहीं है।
रिसर्च के अनुसार, हफ्ते में करीब 90 से 120 मिनट (यानी लगभग डेढ़ से दो घंटे) की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सबसे ज्यादा फायदेमंद मानी गई। ऐसे लोगों में मृत्यु का जोखिम काफी कम पाया गया। साथ ही यह बात भी सामने आई की कोई अगर इससे ज्यादा भी करता है, तो अतिरिक्त फायदा उतना ज्यादा नहीं बढ़ता।
स्टडी में यह भी पाया गया कि जो लोग बहुत कम मात्रा में भी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, उन्हें भी कुछ हद तक फायदा मिलता है। लेकिन सबसे बड़ा असर तब देखने को मिला जब स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को कार्डियो एक्सरसाइज के साथ मिलाया गया। जो लोग वॉकिंग, रनिंग, साइक्लिंग जैसी गतिविधियों के साथ हल्की वेट ट्रेनिंग भी करते थे, उनकी सेहत सबसे बेहतर पाई गई। ऐसे लोगों में मृत्यु का जोखिम 50 प्रतिशत तक कम देखा गया, उन लोगों के मुकाबले जो बिल्कुल भी एक्सरसाइज नहीं करते थे।
वैज्ञानिकों के अनुसार, कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों का शरीर पर अलग-अलग असर होता है। कार्डियो दिल और फेफड़ों को मजबूत बनाता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करता है, जबकि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मांसपेशियों, हड्डियों और शरीर की ताकत को बनाए रखती है। दोनों मिलकर शरीर को एक तरह की 'फुल प्रोटेक्शन' देते हैं, जिससे उम्र बढ़ने के साथ होने वाली कई समस्याओं का खतरा कम हो सकता है।
हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी साफ किया कि यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी है। इसमें लोगों ने खुद अपनी एक्सरसाइज की जानकारी दी थी, इसलिए थोड़ी बहुत गलती की संभावना रहती है। यह सीधे तौर पर यह साबित नहीं करती कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग ही लंबी उम्र की वजह है, लेकिन दोनों के बीच मजबूत संबंध जरूर दिखाई देता है।

