सतना, अंबिका केशरी। कल 1 मई को पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाएगी। लेकिन विंध्य के औद्योगिक गढ़ कहे जाने वाले सतना जिले के हजारों मजदूरों के लिए यह दिन कैलेंडर की एक तारीख से ज्यादा कुछ नहीं है। स्मार्ट सिटी की ओर कदम बढ़ाते सतना में गगनचुंबी इमारतें खड़ी करने वाले मजदूर आज भी बुनियादी सुविधाओं और शासन की योजनाओं से कोसों दूर हैं। सतना के सिंधी कैंप स्थित 'श्रमिक मंडी' (मजदूर चौक) की तस्वीर आज भी वैसी ही है जैसी सालों पहले थी। सुबह 7 बजते ही सैकड़ों की तादाद में मजदूर काम की तलाश में इकट्ठा होते हैं। बता दें कि जिले में पंजीकृत मजदूरों की संख्या लाखों में है, लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार केवल एक छोटे प्रतिशत (करीब 10% से भी कम) को ही मनरेगा या अन्य योजनाओं के तहत साल के 100 दिन का काम मिल पा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट बताती है कि कई क्षेत्रों में मनरेगा मजदूरी का भुगतान महीनों लंबित रहा है, जिससे परिवारों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। शासन द्वारा संबल योजना, आयुष्मान कार्ड और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी दर्जनों योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन सतना के जमीनी हालात अलग कहानी बयां करते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जागरूकता की कमी और जटिल कागजी प्रक्रिया के कारण हजारों निर्माण श्रमिक 'भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड' में पंजीकृत नहीं हैं। इसके बिना वे दुर्घटना बीमा और बच्चों की छात्रवृत्ति जैसे लाभों से वंचित रह जाते हैं। योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर सक्रिय 'दलाल' मजदूरों की गाढ़ी कमाई का एक हिस्सा डकार जाते हैं।
सतना अपनी सीमेंट फैक्ट्रियों और चूना भट्टियों के लिए मशहूर है, लेकिन यहाँ काम करने वाले ठेका मजदूरों की सुरक्षा राम भरोसे है। कई निजी ठेकेदार सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दर से काफी कम भुगतान कर रहे हैं, जिसका विरोध करने पर उन्हें काम से निकालने की धमकी दी जाती है। मजदूरों का कहना है कि प्रशासन को केवल 'मजदूर दिवस' पर रस्मी आयोजन करने के बजाय, श्रमिक चौराहों पर पंजीकरण कैंप लगाने चाहिए। जब तक प्रशासन सीधे मजदूरों तक नहीं पहुंचेगा, तब तक "मजदूर की खुशहाली" का नारा केवल कागजों तक सीमित रहेगा। मजदूरों का कहना है कि
"हम शहर बनाते हैं, लेकिन शहर में हमारा कोई ठिकाना नहीं। कल मजदूर दिवस हम लोगों के लिए एक त्यौहार जैसा है पर हमारे घर में चूल्हा तभी जलेगा जब आज काम मिलेगा।

